" /> महाराष्ट्र का उद्योग पर्व, …लेकिन क्या कोरोना मरेगा?

महाराष्ट्र का उद्योग पर्व, …लेकिन क्या कोरोना मरेगा?

मुख्यमंत्री ठाकरे ने बरसात से पहले कोरोना संकट को समाप्त करने का संकल्प लिया है। यह संकल्प मोदी के आत्मनिर्भर अभियान का ही एक हिस्सा है और उस दृष्टि से मुख्यमंत्री ठाकरे का बयान आशादायी है। मानसून अंडमान और फिर केरल पहुंच गया है। कल गोवा और कोंकण क्षेत्र में भी रिमझिम बारिश हुई। मानसून के किसी भी समय मुंबई पहुंचने और मूसलाधार बारिश की संभावना है। इसलिए मुख्यमंत्री के संकल्प को सफल बनाने के लिए प्रशासन को कड़ी मेहनत करनी होगी। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में महज १५ दिनों में अत्याधुनिक १,००० बेड के अस्पताल का निर्माण किया गया और इसका लोकार्पण सोमवार को मुख्यमंत्री ने किया। ऐसे कई अस्पताल बनाए जा रहे हैं। किसी भी अन्य राज्य के पास ऐसी उत्तम स्वास्थ्य सेवा देखने को नहीं मिलती। इसलिए मानसून से पहले कोरोना से निपटने का मुख्यमंत्री का फैसला महत्वपूर्ण है। राज्य में कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा ३५,००० पहुंच गया है। यह कहा नहीं जा सकता कि बरसात में यह नियंत्रण में रहेगा या बढ़ेगा?इसलिए मुख्यमंत्री ने रेड जोन के अंतर्गत आनेवाले क्षेत्रों पर से प्रतिबंध नहीं हटाया है। प्रतिबंधों में कोई रियायत भी नहीं दी गई। लेकिन राज्य सरकार ने मंगलवार को ऑरेंज और ग्रीन जोन में कुछ हद तक प्रतिबंधों को कम करने के निर्णय की घोषणा की। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र में एक नया उद्योग पर्व शुरू करने की घोषणा की है। सरकार ने राज्य में नए उद्योगों के लिए ४०,००० एकड़ भूमि आरक्षित रखी है। उद्योग के लिए नियम और शर्तों में छूट दी गई है।उन्होंने उद्यमियों से राज्य में आने और उत्पादन शुरू करने की अपील की है। बेशक ऐसा कहते ही नए उद्योग लग जाएंगे और तुरंत काम शुरू हो जाएगा, ऐसा नहीं है। बिजली-पानी का सवाल है। श्रमिकों-कामगारों का मामला है। नए उद्योगों के मन में लालफीताशाही का डर भी हो सकता है। इसे राज्य के उद्योग मंत्री को दूर करना होगा लेकिन यह रातों-रात नहीं होगा। नए उद्यमी कोई जादुई छड़ी लेकर नहीं आएंगे और सरकार के पास भी ऐसी कोई छड़ी नहीं है। यदि निवेशक जमीन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते तो हम उन्हें पट्टे के आधार पर जमीन देंगे, ऐसा मुख्यमंत्री महोदय कहते हैं। अन्य राज्यों में सरकारें निवेशकों को मुफ्त जमीन, बिजली और पानी मुहैया कराने को तैयार हैं और उन्होंने जाल फेंक दिया है। इस प्रतियोगिता में महाराष्ट्र कहां है? कोरोना के जोखिम को बढ़ाए बिना राज्य में उद्योग शुरू करना राज्य सरकार की नीति है। नए उद्योग नए गलीचे से आएंगे और उनका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन पुराने पारंपरिक उद्योग कोरोना के कारण दम तोड़ चुके हैं। क्या उनके लिए एक गहन देखभाल कक्ष स्थापित किया जा सकता है? मुंबई, ठाणे, नई मुंबई, पालघर, पिंपरी-चिंचवड़, नासिक, संभाजीनगर, नागपुर में उद्योग बंद होना आश्चर्यजनक है। टाटा, महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, फार्मा कंपनियां, जिंदाल, बिड़ला, बजाज उद्योग समूह सामाजिक चेतना का ध्यान रखते हैं। उनके उद्योग शुरू करने की जरूरत है। कन्टेनमेंट जोन यानी कोरोना से जो हिस्सा अति-प्रभावित है, उसे कड़ाई से बंद रखना ही चाहिए। मुख्यमंत्री इस बारे में गंभीर हैं और वे सही हैं, लेकिन नए कदम उठाए जाने के साथ ही राज्य के पुराने लोगों की भी जरूरत है। केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि राज्य में होटल व्यवसाय ठप हो चुका है। माथेरान, महाबलेश्वर, लोनावला-खंडाला, अलीबाग जैसे पर्यटन क्षेत्रों में होटल व्यवसाय व्यापक है। पर्यटन और होटल व्यवसाय एक -दूसरे पर आश्रित श्रृंखला है। यह कारोबार बंद है। तो इन क्षेत्रों के बारे में क्या? चाय की टपरी से लेकर बड़े रेस्तरां तक ​​आज सब कुछ बंद है। केंद्रीय वित्त मंत्री के ‘पैकेज’ में इस व्यवसाय को सहूलियत देने की नीति नहीं दिख रही। पुराने व्यवसाय को नए तरीके से दोबारा शुरू करने की जरूरत है। मोदी शासन में व्यापार के लिए अनुकूल माहौल नहीं है। लाभ कमानेवाला चोर या डाकू है, ऐसा विचार सरकार द्वारा फैलाया गया। पैसा कमाना अपराध या धोखा है। इसलिए नोटबंदी जैसे असफल प्रयोग करके अर्थव्यवस्था ही बिगाड़ दी गई। महाराष्ट्र में आने वाले उद्योगों को इस तनाव से बाहर निकालना होगा। महाराष्ट्र का राजनीतिक वातावरण उन्मुक्त है और प्रशासन दयालु है, ऐसा करके भी दिखाना होगा। पिछले पांच सालों में कोई भी बड़ा उद्योग महाराष्ट्र में नहीं आया है। यशवंतराव चव्हाण ने औद्योगिक रूप से उन्नत महाराष्ट्र की नींव रखी। ‘बीकेसी’ के भव्य परिसर की संकल्पना शरद पवार की थी। मुंबई-पुणे सहित अन्य शहरों को करीब लाने का काम बालासाहेब ठाकरे के ‘मुंबई-पुणे’ एक्सप्रेस-वे ने किया। कोरोना संकट के कारण पिछले ६० वर्षों में महाराष्ट्र की हुई प्रगति बाधित हुई है। ‘ठाकरे’ सरकार के समक्ष एक नया औद्योगिक महाराष्ट्र बनाने की नई चुनौती है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ‘उद्योग पर्व’ की संकल्पना लाए। यह उद्योग पर्व मेहनत से बने महाराष्ट्र में एक क्रांति लाकर दिखाएगा। कोरोना मानसून से पहले मरेगा और महाराष्ट्र अगले पांच वर्षों में उद्योग-व्यापार में एक बड़ी छलांग लेगा। उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने के अलावा अगले पांच वर्षों तक राज्य में कोई काम नहीं किया जाना चाहिए। उद्योग-व्यवसाय राज्य को संपन्न बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में एक कदम उठाया है। उनका स्वागत है!