महाराष्ट्र में तंबाकू का त्याग, घट रहे हैं नशेड़ी

राज्य के ३४ जिलों में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ग्लोबल डल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार देशभर में महाराष्ट्र में धूम्रपान का प्रमाण सबसे कम होने की बात प्रकाश में आई है। महाराष्ट्र में धूम्रपान में २.१ प्रतिशत और तंबाकू सेवन में ३.१ प्रतिशत गिरावट आई है। ‘तंबाकू मुक्त स्कूल’ अभियान के अंतर्गत २ हजार ७५५ शाला तंबाकू मुक्त किए जाने की जानकारी स्वास्थ्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दी।
राज्य में तंबाकू सेवन के प्रमाण में वर्ष २००५-०६ से २०१५-१६ में गिरावट आई है। वर्ष २००५-०६ में महिलाओं में तंबाकू सेवन का प्रमाण १०.५ प्रतिशत था जो घटकर अब ५.८ प्रतिशत पहुंच गया है, वहीं वर्ष २००५-०६ में पुरुषों में तंबाकू सेवन का प्रमाण ४८.३ प्रतिशत से ३६.६ प्रतिशत तक आया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिलास्तर पर ३०९ तंबाकू मुक्ति केंद्र की स्थापना की है। इन केंद्रों के जरिए जिला और तहसील स्तर पर तंबाकूजन्य पदार्थों से होनेवाले दुष्परिणामों के बारे में जनजागरण एवं समुपदेशन किया जा रहा है। दिसंबर २०१८ के अंतिम तक १ लाख ४२ हजार लोगों का समुपदेशन किया गया है और उसमें से ६ हजार ३२४ लोगों ने तंबाकू का सेवन बंद किया है। राज्य सरकार द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ जिला, तहसील एवं गांव स्तर पर ‘तंबाकू मुक्त स्कूल’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक २ हजार ७५५ स्कूलों को तंबाकू मुक्त किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ‘कोटपा’ कानून के अंतर्गत विविध धाराओं का उल्लंघन करनेवालों व्यक्ति पर कार्रवाई की गई है। दिसंबर २०१८ के अंतिम तक राज्य में १५ लाख ३९ हजार १७४ रुपए जुर्माना वसूल किया गया है।
 २ हजार ७५५ स्कूल तंबाकू मुक्त
 महिला और पुरुषों में तंबाकू सेवन के प्रमाण में गिरावट
 जिलास्तर पर ३०९ तंबाकू मुक्ति केंद्र की स्थापना
 ६ हजार ३२४ ने बंद किया तंबाकू का सेवन