महाराष्ट्र में प्रदूषित हैं पौने दो लाख जलस्रोत, केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय की जांच में खुलासा

घरेलू व गंदा पानी एक जगह केंद्रित होने के कारण राज्य में जलस्रोतों को दूषित होने का खतरा अधिक बन गया है। इसके कारण ७५ से ८० प्रतिशत जलस्रोत दूषित हुए हैं। केंद्रीय पेय और स्वच्छता मंत्रालय राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम अंतर्गत देशभर के सभी राज्यों के जलस्रोतों की जांच करने के बाद यह खुलासा हुआ है। इस जांच में महाराष्ट्र के १ लाख ७१ हजार ४८८ जल स्रोत दूषित हैं। महाराष्ट्र में ५ लाख ९२ हजार ७४३ जलस्रोतों में से ४ लाख ६६ हजार ८९३ जलस्रोतों की जांच की गई। इनमें मानक से अधिक प्रमाण में जल दूषित होने की बात सामने आई यानी ९९ हजार ६०९ जलस्रोतों में सर्वाधिक रासायनिक प्रभाव है तो ७१ हजार ८७५ जलस्रोतों में जीवाणुजन्य जलस्रोत पाए गए हैं। गंदे पानी का शुद्धिकरण न करने से जलस्रोतों को दूषित होने की समस्या भारी पैमाने पर बढ़ी है। इसको विकेंद्रीकरण किए बिना यह समस्या हल होनेवाली नहीं है। पीने के पानी को जल नीति में प्राथमिकता है, उसके बाद सिंचाई को पानी देना चाहिए लेकिन वस्तुस्थिति ठीक उल्टी है। उद्योग को पानी की प्राथमिकता है। पानी में रसायन उद्योग के कारण बढ़ रहे हैं। घरेलू पानी के गंदगी के लिए उद्योग जवाबदार हैं, ऐसा जल विशेषज्ञों का मानना है। पूरे देश में कुल १ करोड़ ४५ लाख ४० हजार ९०० जलस्रोतों में से ९१ लाख १ हजार १९२ जलस्रोतों की जांच की गई, जिसमें से २१ लाख २३ हजार ९४८ जलस्रोतों में रसायन तो ११ लाख ७ हजार १३ जलस्रोतों में जीवाणु के प्रमाण अधिक पाए गए।