महिलाएं नहीं घुस पाईं तो छेड़ दी लड़ाई, रोक दी लोकल उतर गईं ट्रैक पर

प्रतिदिन की भांति गुरुवार को भी दिवा से मुंबई की तरफ जानेवाली कामकाजी महिलाओं को डिब्बे में घुसने नहीं दिया गया। आक्रोशित महिलाओं ने लोकल के गेट पर खड़ी महिलाओं को न केवल बाहर खींच-खींचकर निकालना शुरू कर दिया बल्कि पटरी पर उतरकर लोकल को करीब १५ मिनट तक रोके रखा। महिला पुलिस कर्मचारियों की संख्या बेहद कम होने की वजह से रणचंडी का रूप धारण कर चुकी दिवा की महिलाओं को मनाने में सुरक्षाकर्मियों के पसीने छूट गए। दिवा में इस तरह का यह तीसरा आंदोलन है।

उल्लेखनीय है कि कर्जत तथा कसारा से आनेवाली तेज लोकल गाड़ियां दिवा के प्लेटफॉर्म नं. ४ पर रुकती हैं। पहले से ही खचा-खच भरे डिब्बों में दिवा के यात्रियों को घुसने को नहीं मिलता है। सबसे खराब हालत महिला डिब्बे की रहती है। दो दिन पूर्व एक महिला उस समय प्लेटफॉर्म पर गिरकर बुरी तरह से घायल हो गई जब वह डिब्बे में जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रही थी। दिवा की महिलाओं का आरोप है कि डिब्बे में पहले से घुसी महिलाएं दिवा की महिलाओं के साथ गाली-गलौज करती हैं और लात-घूंसों से मारकर उन्हें डिब्बे में घुसने से रोक देती हैं। गुरुवार की सुबह कर्जत से मुंबई की तरफ जानेवाली ६.५६ बजे की तेज लोकल दिवा के प्लेटफॉर्म नं. ४ पर रुकी तो मोटरमैन के पीछेवाले महिला आरक्षित डिब्बे में दिवा की कुछ महिलाओं ने घुसने का प्रयास किया पर गेट पर खड़ी महिलाओं ने उन्हें घुसने से रोक दिया। प्रतिदिन हो रही इस तरह की परेशानियों से आजिज आकर आज उनका धैर्य जवाब दे गया। वे जबरदस्त आक्रोश में आ गर्इं। दिवा रेलवे स्टेशन पर सिर्फ तीन महिला सुरक्षाकर्मी मौजूद थीं, जो आक्रोशित महिलाओं को रेलवे पटरी से हटाने की नाकाम कोशिश करती रहीं। रेलवे पुलिस के जवान उनसे लगातार पटरी खाली करने का निवेदन करते रहे। घटना की खबर मिलते ही रेलवे पुलिस के अलावा मुंब्रा पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और आक्रोशित महिलाओं पर किसी तरह काबू पाया गया। इस हंगामे के दौरान १४ मिनट तक लोकल खड़ी रही, जिसकी वजह से न केवल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा बल्कि इस रूट पर चलनेवाली सभी लोकल तथा एक्सप्रेस गाड़ियां देरी से चलने लगीं। लगातार की गई मांग पर दिवा में तेज लोकल तो रुकने लगी है पर इसका फायदा दिवावासियों को नहीं मिल पा रहा है। सुबह के समय दिवा से मुंबई के लिए लोकल गाड़ियां छोड़ने की मांग लगातार की जा रही है। रेलवे विभाग इस मांग पर जल्द अमल नहीं किया तो आगे इससे भी खराब हालत और अप्रिय घटनाओं का सामना रेलवे प्रशासन को करना पड़ सकता है।