महिलाएं सशक्त बनें-तापसी पन्नू

अपने दमदार अभिनय क्षमता से करोड़ों सिने प्रेमियों का दिल जीतनेवाली तापसी पन्नू अब बड़े पर्दे से निकलकर शॉर्ट फिल्मों की ओर रुझान कर चुकी हैं। हाल ही में तापसी ने अपनी शॉर्ट फिल्म `नीतिशास्त्र’ का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने इस शॉर्ट फिल्म के माध्यम से समाज को संदेश देने की एक सकारात्मक कोशिश की है और कहा कि हम सब अपराध के खिलाफ सर्वप्रथम अपने घर-परिवार से ही लगाम लगाने की कोशिश करें तो उचित रहेगा। प्रस्तुत है अभिनेत्री तापसी पन्नू से सोमप्रकाश `शिवम’ की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
आप की क्या वजह रही, जो बड़ी-बड़ी फिल्मों के बावजूद आपको शॉर्ट फिल्म करनी पड़ी?
मेरी ऐसी कोई वजह नहीं रही, जिसकी वजह से मुझे शॉर्ट फिल्म करनी पड़ी। मुझे कांसेप्ट अच्छा लगा तो मैंने कर ली। मेरा जो मन करता है, मैं वही करती हूं। निर्देशक कपिल वर्मा ने मुझे एक दिन कहानी सुनाई और कहा कि मुझे आपके टोटल ३ दिन चाहिए तो मैंने सब्जेक्ट के लिहाज से उन्हें ३ दिन दिए बस और कुछ भी नहीं, मेरी बड़ी फिल्में आ रही हैं। आगे भी आती रहेंगी।
आप एक्शन को ज्यादा ही तवज्जो दे रही हैं, क्या वजह है?
ऐसी कोई वजह नहीं है। मैं एक सशक्त जागरूक महिला हूं तो मेरी कोशिश रहती है कि देश की महिलाएं भी ज्यादा से ज्यादा सशक्त बनें। जिन लोगों को यह लगता है कि मैं एक्शन के सिवा कुछ और नहीं कर सकती तो वह मेरी फिल्म ‘पिंक’ और ‘जुड़वा-२’ अवश्य देखें।
आपकी शॉर्ट फिल्म `नीतिशास्त्र’ समाज में कितना बदलाव ला पाएगी?
मैंने फिल्म के माध्यम से समाज को अपराध मुक्त रहने का संदेश देने की कोशिश की है। अब समाज पर निर्भर करेगा कि वह इसे कितना एक्सेप्ट कर पाता है लेकिन हर किसी को इस फिल्म को देखने के बाद अपनों के बीच छिपे अपराधी को सजा देने की एक सकारात्मक प्रेरणा अवश्य मिलेगी। अपराधी हमारा भाई ही क्यों न हो अगर अपराध किया है तो सजा का भी पात्र है वह।
रियल जिंदगी में अगर आपका कोई अपना ही अपराधी हो तो क्या इस फिल्म की भांति ही उसे दंड देंगी आप?
वैसे मैं ऐसा सोचती तो नहीं हूं कि कभी मेरे घर-परिवार में ऐसा अपराधी हो। फिर भी अगर ऐसा होता है तो निश्चित ही सजा का पात्र होगा और मैं उसके खिलाफ सर्वप्रथम आवाज बुलंद करूंगी। क्योंकि अपराधी भी तो किसी न किसी के भाई बेटे ही होते हैं। तो जब अपराध किया है तो सजा भी भुगतनी होगी।
भविष्य में आप किस तरह के किरदारों को प्राथमिकता देंना चाहेंगी?
मुझे हर तरह के किरदार पसंद हैं। मेरी नजर में कोई भी किरदार छोटा या बड़ा नहीं होता। इसलिए मैं हर किरदार करना चाहूंगी। फिल्म में अगर सशक्त महिला का किरदार है तो उसे करने में अधिक दिलचस्पी रहती है। यह मेरे स्वभाव में निहित है।