" /> महिलाओं के हाथ होगी भविष्य की कमान

महिलाओं के हाथ होगी भविष्य की कमान

आनेवाला समय विशेष रूप से २०२० और २०५० के बीच के दशक शायद इस विश्व में कुछ ऐसे बदलाव लेकर आएंगे, जिनकी अभी हम कल्पना भी नहीं कर रहे हैं। हालांकि हम उसकी रूपरेखा चौथी औद्योगिक क्रांति के रूप में बना चुके हैं। ये दशक तकनीक के क्षेत्र में कुछ ऐसे मूलभूत बदलाव लेकर आएंगे, जो पहले घटी औद्योगिक क्रांतियों की रूपरेखा से बहुत भिन्न होंगे। इन तीन दशकों की मानसिक तैयारी मानव को अभी से करनी होगी। पिछली तीन क्रांतियों से भिन्न इस क्रांति में महिलाओं की एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जिसमें महिला और पुरुष कदाचित पहली बार समान रूप से मिलकर एक नई दशा और दिशा को जन्म देंगें। ये आनेवाले दशक अभी अपने गर्भ में बहुत कुछ छुपाए हुए हैं पर एक आभास होना प्रारंभ हो गया है कि इस युग में मशीनों की भूमिका पिछली क्रांतियों के मुकाबले न केवल भिन्न होगी परंतु उनके आयाम भी एक नई ‘कृत्रिम वास्तविकता’ को संग लेकर आनेवाले हैं।
पिछले कुछ वर्षों से हमने देखा है कि चौथी औद्योगिक क्रांति का प्रारंभ हो चुका है और उसमें आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचैन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, अंतरिक्ष से संबंधित तकनीकें, सूक्ष्म मेडिसिन, शहरों के नए रूप और प्रबंधन, संवाद और आधुनिक यातायात प्रमुख भूमिका निभानेवाले हैं। इन सबके लिए सक्षम मानव संसाधनों की आवश्यकताएं प्रमुख होंगी। इस संदर्भ में भारत की भूमिका बहुत ही सक्षम और सशक्त होगी एवं महिलाएं इसमें पहली बार पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर इस औद्योगिक क्रांति को नया मूर्तरूप देंगी।
पिछले कुछ समय से एक बात प्रमुखता से निकलकर आई है कि महिलाओं की शिक्षा का स्तर अब लगभग पुरुषों के समान हो चला है एवं कई क्षेत्रों में उनका स्तर पुरुषों से भी बेहतर हो गया है। इंजीनियरिंग, मेडिसिन, आर्किटेक्चर, कानून, सूचना प्रौद्योगिकी में जो छात्र अब स्नातक बन कर निकल रहे हैं, उनमें महिलाओं की लगभग समान भागीदारी हो गई है। वैज्ञानिक अनुसंधान में भी अब महिलाएं लगभग बराबरी पर आ गई हैं। जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं सक्षम होकर महाविद्यालयों से निकल रही हैं तो इसका मतलब बिलकुल स्पष्ट है कि उनका योगदान और उत्पादकता भी पुरुषों के बराबर आ गई है। ये बदलाव कई सदियों के बाद आया है, जहां उच्च शिक्षा में पुरुषों का प्रभुत्व और एकाधिकार समाप्त हो चला है। ये एक क्रांतिकारी बदलाव है।
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स में महिला वैज्ञानिक अनुसंधान के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान में वरिष्ठ वैज्ञानिक पदों पर अब आप महिलाओं को देख सकते हैं। इसी प्रकार ड्रोन तकनीक और सूक्षम मेडिसिन में महिला सर्जन्स और अनुसंधानकर्ता बड़ी संख्या में हैं। शहरों की नई प्रबंधन तकनीकों में अब बड़ी संख्या में महिला प्रबंधक जो उच्च संस्थानों से निकलकर आ रही हैं, इसमें बड़ा योगदान दे रही हैं। प्रकृति और क्लाइमेट की रिसर्च में बहुत भारी संख्या में भारतीय महिला वैज्ञानिक और विशेषज्ञ अब सकारात्मक योगदान दे रही हैं।
देखा जाए तो चौथी औद्योगिक क्रांति की सूत्रधार अब पुरुषों के साथ महिलाएं भी समान रूप से हो चली हैं। यह एक सकारात्मक बदलाव है। विश्व में जहां विकासशील देशों में महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आ रहे हैं, वहीं उच्च शिक्षा की बदौलत भारत में यह परिवर्तन अभूतपूर्व हैं। पहली दो औद्योगिक क्रांतियों में भारत की कोई हिस्सेदारी नहीं थी पर तीसरी क्रांति जो कि सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति कही जाती है, वहीं से महिलाओं को एक नई दिशा मिलनी प्रारंभ हो गई थी। यहां आते-आते भारतीय महिलाएं अब इस नई चौथी औद्योगिक क्रांति के लिए बिल्कुल तैयार हैं और शायद पहली बार भारत आनेवाले तीन दशकों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है और इस क्रांति में महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय और अतुलनीय रहने की पूरी संभावना है।
आनेवाले तीन दशक हर भारतीय के लिए बहुत बड़ा बदलाव लेकर आएंगे। इस बदलाव के लिए महिला शक्ति की एक अनमोल भूमिका होगी और साथ में यह इस बात की अभिव्यक्ति और स्वीकृति भी होगी कि महिलाओं की बराबरी का सपना जो हमने देखा था, अब वो पूरा होने के बहुत नजदीक है। हम सभी को प्रतीक्षा है इन आनेवाले तीन दशकों की, जो अब हमारे प्रगति के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं।