महिला कोच में पुरुषों की घुसपैठ!, रोज पकड़े जाते हैं ३७ यात्री

मुंबई की लाइफलाइन मानी जानेवाली लोकल ट्रेन में महिला यात्रियों की सुरक्षा हमेशा से ही चिंता का विषय रही है। आए दिन यहां महिला सुरक्षा से जुड़े अपराध होते रहते हैं। सफर के दौरान कई पुरुष यात्री ऐसे होते हैं जो महिला कोच में घुसपैठ कर बैठते हैं। आरपीएफ से प्राप्त जानकारी के अनुसार लोकल ट्रेनों के महिला कोच में औसतन रोजाना ३७ यात्री घुसपैठ करते हैं, जिन्हें आरपीएफ महिला यात्रियों की शिकायत पर धर दबोचती है।
मुंबई के उपनगरीय मार्ग पर रोजाना सुबह और शाम के व्यस्ततम समय में यात्रियों की काफी भीड़ रहती है। इस भीड़ के दौरान कई यात्री ऐसे होते हैं, जो ट्रेन पकड़ने के चक्कर में महिला कोच में घुस जाते हैं। आरपीएफ से प्राप्त आंकड़ों को देखें तो साल २०१७ के मुकाबले साल २०१८ में महिला यात्रियों के कोच में पुरुष यात्रियों द्वारा घुसपैठ के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। इस मामले में भले ही आरपीएफ ने सभी घुसपैठ करनेवाले यात्रियों को पकड़ा है लेकिन इस तरह की घुसपैठ के पीछे यात्रियों के बीच ठीक तरह से रेलवे द्वारा प्रचार-प्रसार न होना है। आंकड़ों के मुताबिक साल २०१७ में १ जनवरी से २५ अक्टूबर तक आरपीएफ ने ९,२१६ पुरुष यात्रियों को महिला कोच में घुसपैठ करने के आरोप में पकड़ा था जबकि इस साल जनवरी से २५ अक्टूबर तक ११,०८१ पुरुष यात्रियों को घुसपैठ करते पकड़ा है, जो कि इस तरह के मामले पिछले साल की तुलना में अधिक हैं। इसी तरह रेलवे एक्ट के तहत आनेवाले अन्य अपराधों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। साल २०१७ में २५ अक्टूबर तक आरपीएफ ने फुटबोर्ड पर खड़े रहकर सफर कर रहे ४,३३२ लोगों को पकड़ा था। ये यात्री फुटबोर्ड पर खड़े रहकर अन्य यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने नहीं देते थे। इस तरह के मामलों में आरपीएफ ने साल २०१८ में अक्टूबर तक बढ़कर ६,४३६ लोगों को फुटबोर्ड पर सफर करते पकड़ा है। पश्चिम रेलवे आरपीएफ के सीनियर डीएससी अनूप शुक्ला ने बताया कि महिला यात्रियों द्वारा निरंतर शिकायत मिलने पर हमने यह कार्रवाई शुरू की थी, जो अभी भी जारी है।