मां की आंखों से बॉलीवुड देखा! – बनिता संधू

दुनिया की आधी आबादी को अभिनय में जाने की चाहत होती है। ये बात दूसरी है कि कोई अपनी भावनाओं को व्यक्त करता है तो कोई नहीं। मायानगरी मुंबई में अभिनय के लिए कोशिश करनेवाले अनगिनत चेहरे हैं, जिन्हें कड़े संघर्ष के बावजूद फिल्मों में अभिनय के मौके नहीं मिलते। यूके (इंग्लैंड) से हिंदुस्थान आई १९ वर्षीय बनिता संधू खुशकिस्मत तो हैं ही साथ ही टैलेंटेड भी हैं। सुजीत सरकार जैसे मंजे हुए मेकर के साथ फिल्म करना आसान नहीं है। वरुण धवन आज के टॉप स्टार हैं, जिनके साथ बनिता ने अपनी अभिनय की पारी फिल्म `ऑक्टोबर’ से शुरू की है। बेहद एक्सप्रेसिव आंखोंवाली छुईमुई बनिता से पूजा सामंत ने विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘ऑक्टोबर’ आपको कैसे मिली?
मैं यूके में ही अपने परिवार के साथ रहती हूं लेकिन शूजीत सरकार के साथ मैंने एक विज्ञापन फिल्म में काम किया। यह एड फिल्म थी, डबल मिंट चुइंगगम की। हालांकि इस विज्ञापन में मेरा सिलेक्शन ऑडिशन देने के बाद हुआ था, शूजीत दा ने २०१६ में इस विज्ञापन को शूट किया था। इस तरह से मेरा और उनका परिचय हुआ था। २०१७ में उनकी फिल्म `ऑक्टोबर’ के लिए फिर से ऑडिशन शुरू हुए। शूजीत दा की ऑफिस से फिर ऑडिशन हुआ और फिर खुद शूजीत दा और उनकी फिल्म लेखिका जूही चतुर्वेदी की तरफ से मेरे लिए हां हो गई।
फिल्म के लिए आपको क्या होमवर्क करना पड़ा?
शूजीत सरकार एक्टर से उसकी ओरिजिनलिटी निकलवाने में माहिर हैं। उनके कोई भी स्टार हों दीपिका पादुकोण या सुपरस्टार अमिताभ बच्चन वे आपको अपने ओरिजनल लुक में नहीं बल्कि किरदार नजर आएंगे। मेरी तो कोई इमेज है ही नहीं पर शूजीत जी का मानना है कि मेरी आंखें एक्सप्रेसिव होने के कारण मैं अपने हावभाव को आंखों से एक्सप्रेस कर सकती हूं। इस फिल्म के लिए मैंने हिंदी सीखा।
कितनी मुश्किलें आर्इं आपको हिंदी सीखने में?
मैं यूके के वेल्स में रहती हूं पर हूं तो हिंदुस्थानी न! कोई अगर हिंदी मुझसे रोज बोलने की प्रैक्टिस करवाएगा तो मैं कम-से-कम फिल्म के संवादों को अच्छे से बोल सकूंगी। शूजीत सरकार ने स्काइप पर मेरे हिंदी उच्चारणों की बहुत अच्छे से प्रैक्टिस ले ली। और हां, एक और बात शूजीत सरकार ने कहा, अगर मैं हिंदी सही न बोल पाई तो मेरी डबिंग किसी और से करवाई जाएगी और मैं नहीं चाहती थी कि मेरी पहली हिंदी फिल्म की डबिंग मेरी जगह कोई और करे, तो मैंने अपना पूरा ध्यान हिंदी सीखने में लगा दिया।
फिल्म में आपका क्या किरदार है?
मेरे किरदार का नाम शिउली है तो वरुण का डेन। शिउली एक गर्ल नेक्स्ट डोअर है। मैं अपने किरदार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकती। यह आम लोगों के जीवन की असाधारण प्रेम कहानी है जिसके दृश्य आपको भाव-विभोर कर देंगे।
आपने इस फिल्म से पहले यूके में क्या किया है?
मैं अपनी मम्मी के कारण हिंदी फिल्मों और यहां के कुछ एक एक्टरों को अच्छे से जानने लगी। यूके में रहकर मैंने अपनी मां की आंखों से बॉलीवुड देखा और समझा। मम्मी को शाहरुख, सलमान की फिल्में अच्छी लगती हैं। मम्मी से ही मीना कुमारी से लेकर ‘मुगल-ए-आजम’, ‘शोले’ जैसी फिल्मों के बारे में सुन रखा था। मुझे इरफान खान अच्छे लगते हैं।
इंडिया में आने और बॉलीवुड में काम करने का अनुभव कैसा रहा?
बहुत अच्छा! बिना किसी फिल्मी कनेक्शन के मुझे शूजीत सरकार जैसे नामी मेकर की फिल्म में सोलो अभिनेत्री का मौका मिला, जिसकी मैंने कभी कल्पना तक नहीं की थी! फिल्म ‘ऑक्टोबर’ का अनुभव ताउम्र मेरे साथ रहेगा।
क्या आप पर वरुण के स्टारडम का कोई प्रेशर था?
नो! नॉट ऐट ऑल! यह एक ताज्जुब की बात थी मेरे लिए की फिल्म ‘ऑक्टोबर’ के लिए पहले मेरा सिलेक्शन हुआ और बाद में वरुण का। शूजीत सर इस फिल्म के लिए नया फ्रेश पेयर लॉन्च करना चाहते थे। मेरा सिलेक्शन होने के बाद जब वरुण का सिलेक्शन हुआ तो मैंने वरुण के बारे में सुना था कि उनकी पिछली फिल्म ‘जुड़वा-२’ सफल रही थी। चूंकि मैं
बॉलीवुड और यहां के सभी स्टारों के बारे में ज्यादा नहीं जानती इसलिए वरुण के स्टारडम के बारे में अंदाजा नहीं था और इसीलिए मुझ पर कोई प्रेशर भी नहीं था।
बॉलीवुड फिल्मों में डांस-सांग्स अहम होते हैं, क्या आपने डांस सीखा है?
आज की पीढ़ी का हर दूसरा युवक-युवती थोड़ा-बहुत डांस करना जानते ही हैं। कॉलेज की पढ़ाई, खेलना-कूदना, शौकिया कमर्शियल्स करना यह सब मैंने १८ वर्षों तक किया। अब निर्भर करता है कि फिल्म
‘ऑक्टोबर’ से मेरा स्वागत कैसे होता है!
आपने कोई नई फिल्म साइन की है क्या?
फिल्म ‘ऑक्टोबर’ के रिलीज होने के बाद मुझे बॉलीवुड में क्या फीडबैक मिलता है, उस पर ही आगे का सफर तय होगा।