" /> मां के निधन का दुख नहीं सह पाए इरफान

मां के निधन का दुख नहीं सह पाए इरफान

अभिनेता इरफान खान अपनी मां को बहुत प्यार करते थे। कुछ दिन पहले ही इरफान की मां का निधन हुआ था पर लॉक डाउन की वजह से वह अपनी मां की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए नहीं जा पाए थे, इसका उन्हें गहरा सदमा लगा था। शायद यही कारण था कि इरफान की तबीयत पिछले कुछ दिनों से कुछ ज्यादा ही खराब हो गई थी। उन्हें अंधेरी के कोकिलाबेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने परसों अपनी आखिरी सांसें लीं। लॉक डाउन की वजह से उनकी अंत्येष्टि में सिर्फ 20 लोग ही शामिल हो पाए थे।
इरफान खान एक बेहतरीन अभिनेता थे। उनकी आंखें बोलती थीं। फिल्म लाइफ ऑफ पाई में उनकी आंखों की भाव भंगिमा की काफी तारीफ हुई थी। छोटे से छोटा रोल ही क्यों न हो, इरफान अपनी छाप जरूर छोड़ जाते। गत मार्च में रिलीज हुई उनकी फिल्म अंग्रेजी मीडियम लॉक डाउन की शिकार हो गई थी। यह एक बेहतरीन फिल्म है और लोग अभी भी इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख रहे हैं। इस फ़िल्म में भी इरफान ने अपनी आंखों के भावों का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। खासकर लंदन का वह सीन जब उनकी बेटी विद्रोही तेवर अपनाती है। तब बाप की बेबस आँखें बस बिना कहें बहुत कुछ कह जाती हैं। यह काम तो सिर्फ इरफान ही कर सकते थे। इसी तरह हिंदी मीडियम में भी उन्होंने अपने अभिनय के जलवे बिखेरे थे। इसके कुछ समय बाद आई थी फिल्म पीकू। इसमें भी एक टैक्सी कंपनी के मालिक के रूप में इरफान ने गजब का अभिनय किया था। खासकर जब वे चलती टैक्सी में अमिताभ बच्चन को झिड़कते हैं तो वह सीन जबरदस्त बन पड़ा था। निर्माता नितिन केनी बताते हैं कि 1993 में जी के सीरियल बनेगी अपनी बात के लिए उनकी इरफान से पहली बार भेंट हुई थी और उन्होंने उनमें कमाल की प्रतिभा देखी थी। बाद में डी डे में तो इरफान और ऋषि कपूर के साथ काम करने का मौका मिला था। बाद में लंच बॉक्स और जज्बा में फिर इरफान के साथ काम करने का मौका मिला था। 2018 में एक प्रोजेक्ट हाफ पेयर के लिए मुलाकात हुई पर उसके बाद इरफान बीमार पड़ गए। इरफान जैसे अभिनेता का जाना बॉलीवुड का काफी बड़ा नुकसान है।