माथा उठा कर देखो माथेरान का नजारा, नेरल से माथेरान चलेगी शिमला जैसी ट्रेन

नेरल से माथेरान के बीच चलनेवाली टॉय ट्रेन जल्द ही विस्ताडोमयुक्त होगी, जिससे टॉय ट्रेन का सफर करनेवाले पर्यटक माथा उठाकर माथेरान की खूबसूरत वादियों का नजारा देख सकेंगे। मध्य रेलवे जल्द ही नेरल-माथेरान के बीच शिमला जैसी विस्ताडोमयुक्त टॉय ट्रेन चलाने जा रही है।
जानकारी के मुताबिक भारतीय रेलवे में सर्वप्रथम विशाखापट्टनम में विस्ताडोम कोच का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इस कोच को तेजस एक्सप्रेस में भी लगाया गया। इस कोच की विशेषता यह है कि इसकी छतें शीशे की हैं साथ ही पर्यटक इस कोच में बैठे-बैठे ३६० डिग्री प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। विदेशों में ८ प्रकार के विस्ताडोम कोच काफी लोकप्रिय हैं। इसके बाद हिंदुस्थान में भी इस तकनीक को धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है। शिमला में भी विस्ताडोमयुक्त टॉय ट्रेन काफी लोकप्रिय हो रही है। इसी को देखते हुए रेलवे अब विस्ताडोम कोच माथेरान में शुरू करने जा रही है। हाल ही में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने भी विस्ताडोम कोच का जायजा लिया था। अधिकारियों के मुताबिक विस्ताडोम कोच को रूपरेखा देने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। २३ फरवरी को नेरल स्टेशन पर इसे डिस्प्ले किया जाएगा।
रेल अधिकारियों का कहना है कि टॉय ट्रेन में इस किस्म का कोच बनाकर जोड़ने में कोई खास पैसा खर्च नहीं होगा। ऐसे में पर्यटकों को भी इस कोच में सफर करने के लिए अधिक पैसे भी नहीं देने होंगे।
सूरज की सीधी किरणों से बचाएगा पर्दा
वातानुकूलित एसी विस्ताडोम कोच को कुछ महीने पहले ही नेरल से माथेरान के बीच यात्री सेवा में शामिल हो जाना था लेकिन कोच पर पड़ रही सूरज की सीधी किरणों से कोच के तापमान को स्थिर रखना कठिन था। ऐसे में रेलवे ने सूरज की सीधी किरणों से बचने के लिए कोच के अगल-बगल और ऊपर की ओर पर्दे का इस्तेमाल किया है।