मानव तस्करी का नया ‘रेट कार्ड’ एक बाल मजदूर की कीमत `१०,०००

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बाल मजदूरी के लिए मानव तस्करी का जाल अन्य राज्यों में तेजी से पैâल रहा है। इस गोरखधंधे में सक्रिय तस्करों ने बाकायदा इसका रेट कार्ड भी तय कर लिया है। इस रेट कार्ड के तहत प्रत्येक बाल मजदूरों के लिए तस्कर आठ से दस हजार रुपए कंपनी मालिकों से वसूल रहे हैं।
बता दें कि बाल मजदूरी की रोकथाम के लिए सक्रिय प्रथम संस्था ने मुंबई पुलिस की मदद से दक्षिण मुंबई से १९ बाल मजदूरों को छुड़ाया है। ‘प्रथम’ के नवनाथ कांबले ने बताया कि छुड़ाए गए बाल मजदूर भायखला, आग्रीपाड़ा आदि इलाकों के बैग बनानेवाले कारखानों में काम कर रहे थे। छुड़ाए गए बाल मजदूर बिहार और नेपाल के रहनेवाले हैं। बताया जाता है कि बीते तीन वर्षों में तीन हजार से अधिक बाल मजदूर धारावी, मदनपुरा, बांद्रा, गोवंडी, अग्रीपाड़ा, ट्रांबे आदि इलाकों से छुड़ाए गए जबकि २०० से अधिक कारखाना मालिकों और मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। नवनाथ कांबले की मानें तो बाल मजदूरों के लिए मानव तस्करों का एक गिरोह बिहार, झारखंड, नेपाल आदि राज्यों में सक्रिय है। तस्करों ने अपने रेट कार्ड भी तय कर रखे हैं। बाल मजदूरों की उम्र के हिसाब से तस्करों ने रेट तय किया है। कम उम्र के बच्चों के लिए कम से कम आठ हजार रुपए और १४ वर्ष के बच्चों के लिए दस हजार रुपए यह कंपनी मालिकों से वसूलते हैं। तस्कर इन रुपयों में बाल मजदूरों के परिवारों से लेकर मुंबई पहुंचने तक उनका किराया भी वहन करते हैं। तस्कर इन बच्चों के माता-पिता को महज दो से तीन हजार रुपए देते हैं। इतना ही नहीं हर माह काम के एवज में अच्छी रकम मिलने का लालच भी बच्चों के माता-पिता को देते हैं। आर्थिक बदहाली के शिकार माता-पिता इन तस्करों की मीठी बातों में फंस जाते हैं।
बिहार, नेपाल और झारखंड के बच्चे होते हैं शिकार
उम्र के हिसाब से तय है रेटकार्ड