मारक मेरीटाइम बोर्ड की बेहिसाब लापरवाही 

मुंबई के समुद्र का पूरी तरह उपयोग करने के लिए परिवहन व जल संसाधन मंत्री नितिन गड़करी अनेक उपाय योजना बनाने में जुटे हैं लेकिन समुद्र में एक के बाद एक हो रही दुर्घटनाओं से कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठे भी क्यों न पहले फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और अब शिवाजी स्मारक की ओर जा रही नौका का दुर्घटनाग्रस्त होना यह साफ दर्शा रहा है कि जल संसाधन पर नजर रखनेवाली महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) की बेहिसाब लापरवाही लोगों के जान की दुश्मन बन रही है।
बता दें कि राज्य के बंदरगाहों, उनके संरक्षण, शिल्प के लाइसेंस, फीस लेने, विनियमन और यातायात के नियंत्रण का काम एमएमबी का होता है। मुंबई के समुद्र में २४ अक्टूबर को एक दु:खद घटना घटी। जब शिवाजी स्मारक के लिए जा रही एक नौका दुर्घटना का शिकार हुई। प्राथमिक जांच में कई खामियां सामने आर्इं जैसे नौका को चलाने का परमिट न मिलने के बावजूद उसे चलाया गया, बोट में क्षमता से अधिक लोगों को भरा गया, तय रूट से जाने की बजाय पथरीले समुद्री मार्ग से बोट को ले जाया गया। नतीजन बोट पानी में मौजूद पत्थर से टकरा कर डूब गई और इस हादसे में एक की मौत हो गई। मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एमएमबी द्वारा ट्रेनिंग देने के बाद बोट चलाने का सर्टिफिकेट दिया जाता है, ऐसे में तय रूट पर न जाकर चालक ने नियम का उल्लंघन कर शॉर्टकट रास्ता अपनाया। छोटी बोट का रास्ता चालकों को ही मालूम रहता है। ऐसे में कहीं न कहीं छोटी बोटों द्वारा नियमों को ताक पर रखा जा रहा है और इन पर लगाम कसने में एमएमबी लापरवाही बरत रही है। इस संदर्भ में एमएमबी के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
संकट संकेत यंत्र भी नहीं था
एमएमबी के सूत्रों की मानें तो दुर्घटनाग्रस्त नौका में संकट में संकेत भेजनेवाला यंत्र भी न होने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों की मानें तो हादसे की आहट को भांपने में यंत्र काफी मददगार होता है लेकिन इस नौका में फिटनेस के अलावा अनेक खामियां थीं इसके बावजूद इसे यात्रियों को ढोने के लिए जाने दिया, यह सरासर एमएमबी की लापरवाही है।