मासूम ने निगला बल्ब

 रुक गई हृदय की गति  डॉक्टरों ने बचाई जान

ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जब अभिभावकों की जरा-सी लापरवाही अबोध मासूमों के जान के लिए खतरा बन जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ उरी की रहनेवाली ५ वर्षीय समृद्धि संजय पवार के साथ। सजावट के लिए इस्तेमाल होनेवाला छोटा बल्ब बच्चे ने गलती से निगल लिया। ऐसे में डॉक्टरों ने बिना-चीरफाड़ के एंडोस्कोपी सर्जरी कर बल्ब निकालने की कोशिश की, जिसके चलते मामला बिगड़ गया और बच्ची के हृदय की गति रुक गई (कार्डियक अरेस्ट), उसके बाद लीलावती अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्ची की सर्जरी कर उसकी जान बचाई।
बता दें कि दीवाली में घर को रोशन करने के लिए इस्तेमाल की जानेवाले लाइट का बल्ब नीचे गिर हुआ था। बच्ची ने एलईडी बल्ब को मुंह डाल लिया। अभिभावकों को पता चलते ही वे तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां वैâमरे की मदद (एंडोस्कोपी) के जरिए बल्ब को निकालने की कोशिश की गई लेकिन बल्ब उसके श्वसनी (ब्रोंक्स) में जा अटका था। डॉक्टरों ने ब्रोकोस्कोपी करने का प्रयत्न किया। इस प्रक्रिया के दौरान बच्ची को कार्डियक अरेस्ट आ गया और उसके फेफड़े में से रक्तस्राव शुरू हो गया। चार बार शॉक देने के बाद उसका दिल फिर चलने लगा, जिसके बाद डॉक्टरों तुरंत उसे बांद्रा स्थित लीलावती अस्पताल भेजा। अस्पताल के डॉक्टरों ने सीटी स्वैâन किया तो पता चला कि बल्ब उसके फेफड़ों में अटका है। अस्पताल के कंसलटेंट कार्डियोथोरारिक विशेषज्ञ डॉ. डी रविशंकर, कंसलटेंट पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राजीव रेडकर व अन्य डॉक्टरों ने मिलकर बच्ची की सर्जरी की तैयारी की। बच्ची के बाएं सीने को चीर कर बल्ब को निकाला गया। यह बहुत बड़ी सर्जरी थी क्योंकि बल्ब काफी अंदर था, जिसके लिए फेफड़ों के भीतर तक जाना पड़ा। आखिरकार डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और बल्ब को निकाला गया।