मिट्टी भर रही पेट मिठाई करे मटियामेट, १५% बढ़े मिठाई के भाव

उत्सव हो या त्योहार खुशी के हर पल में मुंह मीठा कराने की हिंदुस्थानियों की परंपरा रही है। पर बढ़ती महंगाई के कारण इस दिवाली में लोगों का मुंह आधा भी मीठा हो पाएगा या नहीं इसमें संदेह है। दिवाली करीब है और इस दिवाली के मौके पर महंगी मिठाई दिवाली की खुशी को मटियामेट करने पर तुली है। प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध के कारण इस दिवाली में मिट्टी के दीयों के साथ ही मिट्टी के बने अन्य कई प्रकार के कलात्मक दीयों की मांग बढ़ी है। मिट्टी के दीये खरीदनेवालों की संख्या बढ़ने से इसे बनानेवालों में खुशी की लहर है। मिट्टी के सहारे अपने परिवार का भरण-पोषण करनेवाले कुम्हार इस दिवाली में राहत की सांस ले रहे हैं तो मिठाई बेचनेवाले महंगे दूध के कारण परेशान हैं। लोग चाहकर भी इस दिवाली में लोगों का मुंह मीठा कराने से बच रहे हैं। महंगी मिठाई दिवाली की मीठी खुशी को मटियामेट कर रही है। दीया बनानेवालों में थोड़ी खुशी है तो मिठाई बेचनेवालों में बहुत सारा गम है। कहीं खुशी, कहीं गम के चलते हिंदुओं का सबसे ब़ड़ा त्योहार दिवाली, हैप्पी होने की बजाय अनहैप्पी दिवाली में तब्दील हो गई है।

दिवाली में दिए जानेवाले गिफ्ट में मिठाइयों का बड़े पैमाने पर समावेश होता है। दूध के बढ़ते दाम और मिठाई की बढ़ती मांग को देखते इस साल मिठाई बाजार भी गर्म हो गया है। इस साल मिठाई के दामों में लगभग १० से १५ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद दूध और खोवा से बनी मिठाइयों की अधिक मांग हो रही है, ऐसा दुकानदारों का कहना है।
मिठाई व्यापारियों की मानें तो पिछले साल की अपेक्षा इस साल मिठाई के दाम प्रति किलो ५०० रुपए से बढ़कर ९०० रुपए हो गए हैं। पिछले साल की तुलना में लगभग सभी किस्म की मिठाइयों के दामों में वृद्धि हुई है। शहर में दूध के दाम प्रति लीटर २ रुपए बढ़े हैं। ऐसे में दूध से तैयार की जानेवाली मावा बर्फी, रबड़ी, बासुंदी, श्रीखंड, बंगाली मिठाई, काजू कतली आदि मिठाइयों के दाम बढ़े हैं। विदेशों से अंजीर और पिस्ता का आयात घटने से सूखे मावे से तैयार होनेवाली बर्फी ६०० रुपए किलो बिक रही है। काजू से तैयार की गई मिठाई खोवा और दूध से नहीं बनाई जाती है इसलिए ये मिठाइयां ज्यादा दिनों तक टिकी रहती हैं। दादर में फिलहाल काजू से बनी मिठाइयां १,१०० से १,६०० रुपए प्रति किलो मिल रही हैं। इसी तरह मिठाई के लिए इस्तेमाल किए जानेवाले अन्य पदार्थों के दाम बढ़ने से मिठाइयां बाजार में महंगी हो गई हैं।