मिला सोना पर न डगमगाई इमानदारी   

हाल के दिनों में मुंबई व आसपास के इलाकों में घटी बलात्कार, छेड़छाड़, लूट और छिनैती के कई मामलों में आटोरिक्शा चालकों की सन्लिप्तता पाई गई। इससे आटोरिक्शा चालकों की छवि दागदार हुई है। ऐसे ही समय में एक आटोरिक्शा चालक ने अपनी इमानदारी से आटोरिक्शा चालकों का मान बढ़ा दिया। रात के अंधेरे में बस स्टॉप पर पड़े लावरिस बैग में पड़ा सोना उसकी इमानदारी को न डगमगा पाया। बौग को उसने पुलिस थाने पहुंचाया, जिसके बाद पुलिस ने मालिक को  दो घंटे में ढूंढ निकाला तथा बैग और उसमें मौजूद करीब एक लाख रुपए के गहने लौटा दिए।
बता दें कि पुणे स्थित कोथरूड निवासी 57 वर्षीय महिला रत्ना श्रीराम वैद्य, मंगलवार को नीता वॉल्वो बस में अंधेरी के जेबी नगर में रहनेवाली अपनी बेटी से मिलने जा रही थी। रात 8.15 बजे के करीब बस क्रमांक एमएच 47 वाई 0179 में उनके साथ सवार कुछ यात्री बांद्रा-पूर्व स्थित कलानगर बस स्टॉप पर उतर गए। उन यात्रियों ने बस से अपना सामान उतारते समय  रत्ना का गहनों से भरा बैग नीचे उतार दिया और वह बैग वापस बस के लगेज में डालने के बजाय वे वहीं बस स्टॉप भूलकर चले गए। कुछ देर बाद सवारी की तलाश में बस स्टॉप पर पहुंचे आटो चालक सय्यद अखिल जाफर की नजर उस लावरिस बैग पर पड़ी। मौका होने के बावजूद सैयद वह बैग लेकर घर भागने के बजाय खेरवाडी पुलिस थाने पहुंच गया। इस बारे में खेरवाडी पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक राजेंद्र पाटील ने बताया कि पीएसआई महादेव भोसले व शिन्दे ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए नीता वॉल्वो से सम्पर्क किया और उन्हें लावारिश बैग के बारे जानकारी दी तथा वॉल्वो कंपनी से मिली जानकारी के आधार पर रत्ना को ढूंढ निकला। अपनी बेटी के साथ थाने पहुंची रत्ना से बैग और गहनों का विवरण जानने के बाद पुलिस ने गहनों सहित बैग उन्हें लौटा दिया।