" /> मिलेगा कुकर्मों का फल!, आतंकियों को होगा आतंक का एहसास

मिलेगा कुकर्मों का फल!, आतंकियों को होगा आतंक का एहसास

कश्मीर में जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो हिंदुस्थानी फौज अपनी जान की परवाह किए बिना कश्मीरियों की मदद का प्रयास करती नजर आती है। इसके बदले में कश्मीरी लोग हिंदुस्थानी फौज को बाद में पत्थर मारते हैं, गालियां देते हैं और लानत भेजते नजर आते हैं। ऐसे वीडियो अकसर सोशल मीडिया में जब वायरल होते हैं तो हर हिंदुस्थानी का खून खौल उठता है। हालांकि जांच में ऐसा सामने आया है कि पकिस्तान समर्थक कश्मीर के अलगाववादी नेता बेरोजगार कश्मीरियों को पैसे आदि देकर हिंदुस्थान और हिंदुस्थानी फौज के खिलाफ भड़काते हैं। पाकिस्तानी पे-रोल पर कश्मीर घाटी में आतंक का समर्थन करनेवाले कश्मीर के अलगाववादी नेता हिंदुस्थान को अपना दुश्मन मानते हैं। इन अलगाववादी आतंकियों के आतंकित होने का समय आ गया है। इन आतंकियों को अब असली सजा का एहसास होनेवाला है। कोर्ट ने अलगाववादी नेता यासीन मालिक और उसके साथियों के खिलाफ ३० साल पुराने मामले में आरोप तय कर दिए हैं।
यासीन मलिक अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन प्रâंट (जेकेएलएफ) का प्रमुख है। इसकी रैलियों में पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं। यासीन मलिक पर २५ जनवरी, १९९० को हिंदुस्थानी वायुसेना के जवानों पर आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप है। इसमें वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित चार वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि १० वायुसेना कर्मी जख्मी हो गए थे, हालांकि इस मामले में यासीन मलिक को अभी तक सजा नहीं मिली है। यासीन मलिक पर लगातार पाकिस्‍तानी आतंकियों के साथ संबंध रखने के आरोप लगते रहे हैं। वर्ष १९९० में हिंदुओं का कत्लेआम कर उन्हें कश्मीर से बेदखल करने के आंदोलन में यासीन जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यासीन मलिक वर्ष १९९९ और २००२ में गिरफ्तार हो चुका है। वर्ष २००२ में तो उसे पोटा के तहत गिरफ्तार किया गया था।
३० साल पहले यासीन मलिक चरमपंथी संगठन जम्मू- कश्मीर लिबरेशन प्रâंट (जेकेएलएफ) का एरिया कमांडर था। वह चीफ कमांडर अशफाक वानी के लिए काम करता था। वर्ष १९९४ में सेना ने मुठभेड़ में अशफाक वानी को मार गिराया था।
हिंदुस्थान के जांबाज वायुसैनिकों की हत्या के मामले में जेकेएलएफ के चीफ यासीन मलिक समेत अन्यों पर टाडा कोर्ट ने आरोप तय किए हैं। यह घटना कुछ इस तरह से घटी थी। २५ जनवरी, १९९० को सुबह जम्मू एवं कश्मीर के रावलपुरा बस स्टैंड के समीप स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना अपने सहकर्मियों के साथ वायुसेना की बस का इंतजार कर रहे थे। करीब सुबह ७.३० बजे मारुति जिप्सी और मोटरसाइकिल में सवार होकर आए जेकेएलएफ के चार-पांच आतंकियों ने एके-४७ से उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों ने इन निहत्थे और निर्दोष वायुसेना कर्मियों पर बेरहमी से गोलियां बरसार्इं। गोली लगने के बाद स्क्वाड्रन लीडर खन्ना समेत चार वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई, जबकि १० लोग जख्मी हो गए। इस मामले में यासीन मलिक को गिरफ्तार किया गया था। उसको कई जेलों में भी रखा गया लेकिन मेडिकल आधार पर उसको जमानत मिल गई। यासीन इस मामले में १९ साल तक जमानत पर रहा था। पिछले साल उसे गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इस मामले में यासीन मलिक को अभी तक सजा नहीं मिली है लेकिन इसके बाद से वह जेल में ही है। ३० वर्षों से बहस न हो पाने के कारण आरोप तय करने की प्रक्रिया लंबित चल रही थी। अभियोजन की ओर से सीबीआई जांच में सामने आए तथ्यों को कोर्ट के समक्ष रखा गया।
अभियोजन के अनुसार आरोपी शौकत अहमद बख्शी वारदात से पूर्व अप्रैल-मई, १९८९ और सितंबर-अक्टूबर, १९८९ में पाकिस्तान गया। वहां उसने आरोपी अमान उल्ला खान से मिलकर वायुसैनिकों समेत सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश रची। पाकिस्तान से लौटने पर शौकत ने यासीन मलिक, जावेद अहमद मीर उर्फ नलका, मुश्ताक अहमद लोन, नाना जी उर्फ सलीम, मोहम्मद रफीक डार उर्फ गुलाम हसन, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुस्तफा, जावेद अहमद जरगर और अन्यों के साथ हमले की साजिश साझा की। डॉ. गुलाम कादिर सोफी ने हमले को अंजाम देने के लिए हकम बाग रावलपोरा में अपना घर आतंकी ठिकाने के लिए उपलब्ध करवा दिया। पूरे हमले की तैयारी और हथियारों का इंतजाम यहीं से किया गया। आरोपियों ने नीले रंग की मारुति कार जेकेई-३५७५ को अली मोहम्मद मीर से हासिल की। इसके बाद २५ जनवरी, १९९० दो टीम में आतंकियों ने वायुसैनिकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। बाउक सवार पहली टोली ने सात वायुसैनिकों निशाना बनाया था, जिनमें से एयरमैन ए. अहमद, वी.यू. शेखर और बी.एस. धोनी की मौत हो गई। वहीं पास में ही घात लगाकर बैठे दूसरे ग्रुप ने १० से १५ वायुसैनिकों पर फायरिंग शुरू कर दी। इसमें एक महिला समेत तीन वायुसैनिक घायल हो गए। इसी दौरान यासीन मलिक ने भागते समय एके-४७ राइफल दो और वायुसेना अफसरों पर फायरिंग की थी। इनमें से आर.के. खन्ना ने दम तोड़ दिया। वायुसेना कर्मियों पर हमले के बाद जेकेएलएफ के एरिया कमांडर यासीन मलिक ने हत्यारों का बचाव किया था। यासीन ने एक बार माना था कि उसने ४ हिंदुस्थानी सैनिकों की हत्‍या कर दी थी। एक इंटरव्यू में उसने यह भी स्वीकार किया था कि भारतीय वायुसेना के कर्मी बस स्टैंड के पास बस का इंतजार कर रहे थे। उनके पास हथियार नहीं थे। कोर्ट के प्रीसाइडिंग अफसर सुभाष गुप्ता ने गत शनिवार को यासीन मलिक अली मोहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुस्तफा, जावेद मीर उर्फ नलका, नाना जी उर्फ सलीम, जावेद अहमद जरगर और शौकत अहमद बख्शी के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास एवं शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। यासीन के खिलाफ टेरर फंडिंग और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण का मामला भी दर्ज है।