मीठी के नीचे दौड़ेगी मेट्रो

मेट्रो तीन अब मीठी की मांद में सेंध लगाने को तैयार है। अब तक मीठी नदी पर पुल के जरिए सड़क, रेल और हवाई यातायात चल रहा है लेकिन मेट्रो का जाल अब मीठी नदी के भीतर से गुजरेगा। बता दें कि कोलाबा-बांद्रा-सिप्ज मेट्रो-३ पूरी तरह से भूमिगत है। ३३.५ किलोमीटर के इस लंबे अंडर ग्राउंड मेट्रो में से १.१८ किलोमीटर का भाग मीठी नदी के नीचे से होकर गुजरेगा। इसके लिए धारावी से बीकेसी के बीच अंडर ग्राउंड वॉटर टनल का निर्माण किया जाना है। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एमएमआरसी) के अनुसार इस कार्य की शुरुआत फरवरी से होगी।
 पानी के भीतर बनेगा एक स्टेशन
बीकेसी के दक्षिणी छोर में बननेवाला स्टेशन पानी के भीतर ही होगा। इसके टनल का निर्माणकार्य भी फरवरी से ही शुरू होना है। १२.५ मीटर का यह टनल मीठी नदी के नीचे बनेगा। यह देश की दूसरी मेट्रो लाइन होगी जो पानी के नीचे से होकर गुजरेगी, इससे पहले कोलकाता के हुगली नदी के नीचे से मेट्रो को टनल के जरिए पास दिया गया है। जानकारी के मुताबिक फिलहाल मेट्रो-३ के अंडर ग्राउंड टनल निर्माण १७ किलोमीटर तक पूरा हो चुका है।
एमएमआरसीएल के परियोजना निदेशक एस. के. गुप्ता ने बताया कि मुंबई मेट्रो-३ के तहत धारावी से बीकेसी के बीच मीठी नदी के नीचे हम तीन सुरंगों का निर्माण करेंगे। दो सुरंगें नेटम तकनीक से बनाई जाएंगी, जबकि एक सुरंग टीबीएम मशीन के जरिए बनाई जाएगी। नेटम तकनीकी में खुदाई का काम मैनुअल तरीके से किया जाता है। गुप्ता ने बताया कि अगर जमीन दलदली होती है और सुरंग बनाई जाती है, तो पकड़ मजबूत नहीं हो पाती। ऐसे में नेटम तकनीक की मदद से हम पहले कुछ भाग की खुदाई कर उसे कवर करते हैं। यदि जमीन भुरभुरी है तो अंब्रेला मेथड के जरिए पकड़ मजबूत करते हैं। अंब्रेला मेथड में स्टील की छड़ें जमीन के चारों तरफ बिछाई जाती हैं। फिर बोल्ट के जरिए उसे भुरभुरी जमीन से जोड़ देते हैं।