मीठी नदी के नीचे बन रही है अंब्रेला तकनीक से सुरंग, 150 मीटर होगी मेट्रो की खुदाई

३३.५ किमी लंबी कुलाबा-बांद्रा-सिप्ज मेट्रो-३ परियोजना पूरी तरह भूमिगत है। इस भूमिगत मेट्रो में १५३ मीटर लंबे मेट्रो टनल की खुदाई मीठी नदी के २२ मीटर नीचे मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने शुरू कर दी है। मीठी नदी में टनल की खुदाई के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टेक्नोलॉजी मेथड (एनएटीएम) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कोलकाता के हुगली नदी के बाद यह देश की दूसरी मेट्रो लाइन होगी, जो पानी के नीचे से होकर गुजरेगी। यह खुदाई धारावी से बीकेसी के बीच होगी। जानकारी के मुताबिक बीकेसी स्टेशन पानी के नीचे होगा और यह काम १३ अगस्त २०२० में पूरा होगा।
एमएमआरसीएल के अनुसार मुंबई मेट्रो-३ धारावी से बीकेसी के बीच मीठी नदी के नीचे से गुजरेगी। इसके लिए हम तीन सुरंगों का निर्माण करेंगे। २ सुरंगें नेटम तकनीक से बनाई जाएंगी, जबकि एक सुरंग टीबीएम मशीन के जरिए बनाई जाएगी। बीकेसी स्टेशन से कुछ मेट्रो सेवाएं टर्मिनेट होकर वापस की जाएंगी। इसके लिए बगल से एक ट्रैक बनाया जाएगा। बीकेसी स्टेशन के दोनों तरफ साइड ट्रैक बनाए जाएंगे। इसके लिए घोड़े की नाल के आकार की सुरंग बनाई जाएगी। यदि कोई मेट्रो रेक खराब हो जाता है, तो उसे साइड ट्रैक पर छोड़ दिया जाएगा। मेट्रो-३ के कुल २७ स्टेशनों में से २६ स्टेशन अंडरग्राउंड होंगे जबकि बीकेसी स्टेशन पानी के भीतर होगा। मेट्रो-३ परियोजना की कुल लागत २३,१३६ करोड़ रुपए है। इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य साल २०२१ रखा गया है। अनुमान के मुताबिक रोजाना मेट्रो से १३ लाख यात्री सफर करेंगे।

भुरभुरी जमीन पर अंब्रेला मेथड
खुदाई के दौरान यदि जमीन भुरभुरी है तो अंब्रेला मेथड के जरिए पकड़ मजबूत करते हैं। अंब्रेला मेथड में स्टील की छड़ें जमीन के चारों तरफ बिछाई जाती हैं फिर बोल्ट के जरिए उसे भुरभुरी जमीन से जोड़ देते हैं।

ये है नेटम तकनीक
नेटम तकनीक में खुदाई का काम मैनुअल तरीके से किया जाता है। इसमें घोड़े की नाल के आकार की सुरंग बनाई जाती है। इसमें थोड़े से भाग की खुदाई कर उसे कवर किया जाता है और फिर आगे की खुदाई की जाती है।
आती हैं ये दिक्कतें
सुरंग बनाते समय कई दिक्कतें आती हैं। मैनुअल खुदाई के समय जमीन के नीचे ५ मीटर आगे की स्थिति की जानकारी नहीं होती। ऐसे में जमीन दलदली है या फिर चट्टानयुक्त, यह पता नहीं चल पाता। अगर जमीन दलदली होती है और सुरंग बनाई जाती है तो पकड़ मजबूत नहीं हो पाती। ऐसे में नेटम तकनीक की मदद से पहले कुछ भाग की खुदाई कर उसे कवर करते हैं फिर सुरंग की खुदाई आगे बढ़ाने से पहले उसमें छिद्र कर १० से २० मीटर आगे की जमीन का जायजा लेते हैं। जैसी जमीन मिलती है, उस तरीके की खुदाई करते हैं।