मी मुंबईकर, मी बाइकर!, २० साल में बढ़ी पांच गुना बाइक

हर मुंबईकर खुद को शान से ‘मी मुंबईकर’ कहता है। अधिकतर मुंबईकर अब खुद को ‘मी बाइकर’ भी कहने लगे हैं क्योंकि मुंबई में बाइकर्स की संख्या बढ़ती जा रही है।

गत २० वर्षों में बाइक की बिक्री में पांच गुना इजाफा हुआ है। ट्रैफिक में बाइक चलाने में आसानी होती है, वहीं बाइक का माइलेज भी ज्यादा होता है, जिससे जेब पर भार कम पड़ता है। एक लीटर पेट्रोल में लगभग १०० किमी चलनेवाली मोटरसाइकल भी उपलब्ध है। इसके अलावा लोन पर बाइक आसानी से मिल जाती है। इससे लोग बस या ऑटोरिक्शा में जाने की बजाय बाइक से यात्रा करने को प्राथमिकता देते हैं। बिना गियर की स्कूटर्स की बिक्री भी बढ़ी है क्योंकि महिलाएं इसे आसानी से चला सकती हैं। बाजार जाना हो या दोस्तों के साथ लंबी राइड पर, हर कोई बाइक का प्रयोग कर रहा है।

बता दें कि मुंबई में पिछले २० सालों में वाहनों की संख्या में ३.५ गुना इजाफा हुआ है, इसमें बाइक की संख्या पांच गुना बढ़ी है। ऑफिस हो या कॉलेज, अधिकांश मध्यमवर्गीय लोग दुपहिया वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। हालांकि इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा है। बढ़ती बाइक की संख्या से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। ट्रैफिक और पार्विंâग की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। वर्ष १९९७-९८ के आंकड़ों को देखा जाए तो मुंबई में कुल ७१,०१८ वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जिसमें से २८,५८३ दुपहिया वाहन थे, जो कि कुल संख्या में एक तिहाई से भी ज्यादा है। वहीं २०१६-१७ के आंकड़े देखे जाएं तो कुल वाहन २,५२,३०९ थे, जिसमें से १,४१,६९२ दुपहिया वाहन थे। २० सालों में एक तरफ जहां कुल वाहन साढ़े तीन प्रतिशत बढ़े हैं, वहीं दुपहिया वाहनों की संख्या ५ गुना बढ़ी है।