मुंबई की अपनी अयोध्या

ढोल-नगाड़ों की गूंज, हर कंठ पर ‘जय श्रीराम’ का निनाद और चहुं ओर हर्षित वातावरण-जैसे रामनवमी का ही दिन हो। शनिवार सुबह जैसे ही अयोध्या के राममंदिर विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया मुंबई के श्रीराम मंदिरों में धूम मच गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। ‘महाराष्ट्र की अयोध्या’ कहलानेवाले वडाला के श्रीराम मंदिर और भगवान श्रीराम की लीलाभूमि बाणगंगा की तो शोभा ही निराली थी।
शनिवार को वडाला के श्रीराम मंदिर में दर्शन का सुयोग अगर आपके हाथ लगा हो तो आपको अगर गुढी पाडवा से आरंभ होनेवाले यहां के नौ दिनी रामनवमी उत्सव की बरबस ही याद आ जाएगी, जब लाखों श्रद्धालु मर्यादा पुरुषोत्तम के दर्शन करते हैं। तकरीबन यही नजारा कल मुंबई के हर राम मंदिर और अन्य मंदिरों के समक्ष मौजूद था। मुंबई में अन्य प्रमुख देवों की तुलना में श्रीराम के मंदिर कम हैं, पर जो हैं वे बहुत महिमावान हैं। इनमें वडाला के श्रीराम मंदिर को ‘महाराष्ट्र की अयोध्या’ कहा जाता है।
 एक करोड़ ‘राम’ नाम सुरक्षित हैं यहां
१९६५ की बात है। वडाला के श्रीराम मंदिर में पवनसुत हनुमानजी की प्रतिष्ठा के लिए लाई गई प्रतिमा अपने-आप खंडित हो गई। मानो, यह बताते हुए कि इसकी क्या आवश्यकता है। मैं तो सामने मौजूद हूं ही। कारण था, सड़क के ठीक उस पार हनुमानजी का मंदिर। इस घटना के चार दशक बाद मोनो रेल के लिए मंदिर के ठीक सामने कंपनी के लोगों ने, लाख मनुहारों के बावजूद पिलर गाड़ने की कोशिश की तो ड्रिल मशीन अपने आप दो बार टूट गई। यह है मुंबई के सबसे प्रसिद्ध श्रीराम मंदिर की महिमा का गुणगान, जिसे लोग ‘महाराष्ट्र की अयोध्या’ भी कहकर पुकारते हैं। इस मंदिर का इतिहास १५वीं शताब्दी जितना पुराना माना जाता है। मंदिर में श्रीराम के साथ सहधर्मिणी सीता और भ्राता लक्ष्मण की प्रमुख उपस्थिति है। पर, आपको इस परिसर में गणपति, बालाजी, वासुकी और नवग्रहों के छोटे मंदिरों के साथ गंडक (नेपाल) से लाए गए शालिग्रामजी भी स्थापित मिलेंगे। ‘राम’ नामक जप का पुण्य लाभ करना हो तो मंदिर के कोटि श्रीराम महायज्ञ स्मृति मंडप की परिक्रमा करना नहीं भूलिए, जहां एक करोड़ ‘राम’ नाम सुरक्षित रखे हुए हैं।
 लीला भूमि भगवान श्रीराम की
वालकेश्वर की बाणगंगा को उसी तरह चैकित्सिक गुणों से युक्त माना जाता है, जैसे स्वयं गंगा को। बाणगंगा मुंबई का सबसे पवित्र स्थान होने के साथ उसका काशी क्षेत्र भी कहलाता है। उसे पोषित करती है रामकुंड की अजस्र धारा। खारे समुद्र के बिलकुल पास ताजे जल का यह स्रोत किसी को भी चकित करने के लिए काफी है। किंवदंती है कि सीता की तलाश में भगवान राम बाणगंगा आए थे और बालू से शिवलिंग की स्थापना की थी। जब उन्हें प्यास लगी तब लक्ष्मण ने बाण प्रहार से धरती की छाती चीर जल की धार से उन्हें तृप्त किया था। ग्रेड वन का यह हेरिटेज तालाब रोज सुबह सूर्योपासना और श्राद्ध पक्ष में पितरों को तर्पण करने आए धार्मिकों को छोड़ वर्ष के बाकी वक्त अब उपेक्षित ही बना रहता है।
बाणगंगा के ‌इर्द-गिर्द के ५० मंदिरों में श्रीराम मंदिर का विशेष महत्व है। यहां आपको राम के साथ लक्ष्मण, सीता और हनुमान के दर्शन होंगे। इसका निर्माण संन्यासी रामदास बाबा ने किया। १९१८ में भवानी मोहन जीखत्री ने इस पर कलश चढ़ाया। पास के ही वालकेश्वर मंदिर का निर्माण ‌शिलाहार राजाओं ने ८१०-१२६० ईस्वी में कराया।
 यहां भी पड़े थे भगवान राम के चरण
अगर आप वज्रेश्वरी आए हैं तो गणेशपुरी में श्री भीमेश्वर सद्गुरु नित्यानंद संस्थान द्वारा संचालित विशाल आध्यात्मिक केंद्र गुरुदेव सिद्धपीठ की यात्रा का सुयोग मत चूकिए, जो सिद्धयोग के स्वामी श्री नित्यानंद और उनके शिष्य स्वामी श्री मुक्तानंद की समाधियों के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान भगवान राम के चरण पड़ने से पवित्र माना जाता है। आस-पास दर्शन के लिए रामेश्वर महादेव सहित कई मंदिर और मिलेंगे।
 राम‌ सेतु है यहां
गुरु तेगबहादुर नगर स्थित सनातन धर्म सभा के हरिमंदिर में आप रामसेतु का दर्शन भी कर सकते हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के साथ कृष्ण और राधा की मूर्तियां इस तरह से विराजमान हैं, जैसे राम और कृष्ण दरबार साथ-साथ सजा हो। इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण तकरीबन छह किलो वजनी राम शिला है, जो पानी पर तैरती रहती है।
 स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा
मुंबई में राम मंदिर तो वैसे कई हैं, पर भूलेश्वर का राम मंदिर हमेशा एक इतर कारण से जाना जाएगा। वजह है देश के स्वतंत्रता संग्राम में इसकी हिस्सेदारी। यह वही मंदिर है जहां चाफेकर बंधुओं-दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव ने पुणे के अत्याचारी अंग्रेज प्लेग कमिश्नर डब्ल्यू. सी. रैंड की हत्या के बाद भागकर शरण ली थी। ब्रिटिश शासन ने उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया था। राजपूत शैली में बना यह मंदिर काफी दर्शनीय है।
 यहां सजा है राम दरबार
अलग मंदिरों की दृष्टि से देखें तो मुंबई में श्रीराम मंदिर बहुत नहीं हैं। पर, श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां मुंबई के बहुत से मंदिरों में मिलेंगी। खासकर हनुमान मंदिरों में। कालबादेवी के पास पिकेट रोड का हनुमान मंदिर इनमें प्रमुख है। सांताक्रुज के संन्यास आश्रम में आपको राम दरबार सजा हुआ मिलेगा। फणसवाड़ी के श्री वेंकटेश देवस्थान में भी श्री रामचंद्रजी के साथ लक्ष्मण, सीताजी और हनुमानजी की मनोरम झांकी विराजमान है।
 यहां जुटता है फिल्म स्टार्स का मेला
संगमरमर से निर्मित जुहू के हरे राम हरे कृष्ण मंदिर में श्री गौरा-निताई और श्री राधा रासबिहारी के साथ श्री राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की प्रतिमाएं भी शोभायमान हैं। इस्कॉन द्वारा स्थापित यह मंदिर आरंभ से ही फिल्मी सितारों की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है।