मुंबई की कोख में खुदाई, मेट्रो-३ का २५ प्रतिशत काम पूरा

मुंबई में मेट्रो-३ का काम काफी तेजी से हो रहा है। कुलाबा-बांद्रा-सिप्ज के ३३.५ किलोमीटर के अंडर ग्राउंड टनल की खुदाई जारी है। अलग-अलग जगहों पर हो रहे टनल की खुदाई में से लगभग १३ किलोमीटर का काम अब तक पूरा हो चुका है। यानी ऐसा कहा जा सकता है कि मुंबई की कोख में मेट्रो-३ की १३ किमी लंबी रेल लाइन आर-पार हो चुकी है जबकि मेट्रो-३ से जुड़े कुल कामों में से लगभग २५ प्रतिशत से अधिक का काम पूरा हो गया है।
बता दें कि मेट्रो-३ के अंडर ग्राउंड खुदाई के लिए जो टनल बोरिंग मशीन मुंबई के भू-भाग के गर्भ में भेजी गई थी उनमें से २ टनल बोरिंग मशीन आर-पार हो चुकी है। इसमें वैन गंगा-१ और वैन गंगा-२ का समावेश है। पहली बोरिंग मशीन सितंबर में मरोल से टी-२ (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा)के बीच पैकेज-७ के अंतर्गत आर-पार हुई थी। मरोल से टी-२ की यह दूरी तय करने में टीबीएम मशीन को लगभग ९ महीने का समय लगा था जबकि सरीपुत नगर से सिप्ज के बीच वैन गंगा-२ टीबीएम मशीन लगभग आर-पार हो चुकी है। मेट्रो-३ के लिए लगभग ३२ टनल आर-पार होने हैं। जानकारी के मुताबिक मेट्रो-३ के अंडर ग्राउंड टनल की खुदाई के लिए जो टीबीएम मशीनें लाई गई हैं, उसके लिए ९० करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। जिन टीबीएम मशीनों की मदद से अंडर ग्राउंड टनल की खुदाई का काम चल रहा है, उनमें ऑस्ट्रिलियन टेराटेक, स्टेक चाइनीज और हेरेन केनेक जर्मन का समावेश है। मेट्रो-३ का काम २०२१ तक पूरा होना है। हालांकि यह काम अपने निर्धारित समय पर पूरा होगा या नहीं, यह तो आनेवाला समय बताएगा। बताया जाता है कि मुंबई में मेट्रो का जाल बिछ जाने से रोजाना सड़कों पर दौड़नेवाले वाहनों में से ४.५ लाख वाहन के फेरे प्रतिदिन कम होंगे जबकि २०३१ तक सड़कों से कम होनेवाले वाहनों के फेरों की संख्या ६.५ लाख के करीब हो जाएगी, जबकि २.५ लाख लीटर ईधन की बचत होगी और यह आंकड़ा साल २०३१ तक ३.५ लाख तक पहुंच जाएगा। इतना ही नहीं मेट्रो के आ जाने से हर साल २.५ लाख टन वायु प्रदूषण में कमी आएगी। बता दें कि भले ही वर्तमान में शहर में अलग-अलग जगहों पर मेट्रो के हो रहे निर्माण कार्यों के कारण मुंबईकरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन प्रतिदिन मुंबई की बढ़ती जनसंख्या और देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते मेट्रो मुंबई के भविष्य की जरूरत है।