मुंबई के पॉकिटमार! टारगेट महंगे मोबाइल

मुंबई में पिछले १० सालों में काफी बदलाव हुआ है। यह बदलाव खाली बड़े-बड़े अपराधों के अपराधियों में ही नहीं, छोटी-मोटी चोरी करनेवाले चिंदी चोर पॉकेटमारों में भी हुआ है। मुंबई की कई बस्तियों में पहले जेबकतरे शान से बोलते थे ‘भाई आपुन तो पॉकिटमार है क्या?’ लेकिन अब बड़े लेबल के पॉकेटमार अपनी पहचान छुपाकर चलते हैं। उपनगरीय तथा लंबी दूरियों की गाड़ियों में सक्रिय जेबकतरों का क्षेत्र जीआरपी थाने की सीमा के हिसाब से होते हैं। चर्चगेट से मुंबई सेंट्रल, मुंबई सेंट्रल से दादर, दादर से बांद्रा, बांद्रा से अंधेरी, अंधेरी से मालाड, मालाड से दहिसर, दहिसर-मीरा रोड से वसई, इसी तरह सीएसएमटी से दादर, दादर से कुर्ला, कुर्ला से घाटकोपर, घाटकोपर से मुलुंड और उसके आगे अधिकांश रूप से ठाणे, कलवा, मुंब्रा, वसई, नालासोपारा में रहनेवाले जेबकतरों का एकछत्र राज्य चलता है। मीरा रोड के जिस व्यापारी मोइनुद्दीन की जेब काटकर १ लाख ४० हजार रुपए मार लिया गया, उसमें ब्लेड का उपयोग किया गया। यह फॉर्मूला निश्चित रूप से पुराने गिरोह के जेबकतरों का है, जो ट्रेन में चढ़ते या उतरते समय ऑपरेशन के धारदार ब्लेड से जेबें इतनी सफाई से काटते हैं कि पैंट के नीचे जेब तो कट जाती है लेकिन ब्लेड शरीर को टच नहीं करता है। १० सालों बाद जेबकतरों के पहनावों और बोलचाल में काफी बदलाव आया है। पहले के जेबकतरों को आम आदमी आसानी से पहचान जाता था। अब हालात एकदम बदल चुके हैं और जेबकतरों को पहचानना मुश्किल हो जाता है। आरपीएफ के सूत्रों पर विश्वास करें तो अब जेबकतरों का सबसे बड़ा टारगेट महंगे और बड़े मोबाइल होते हैं। इन मोबाइल चोरों के सबसे बड़े ट्रेनर इस समय लौह मार्ग पुलिस थाने के कई भ्रष्ट पुलिसवाले हैं, ये पुलिसवाले इन मोबाइल चोरों को यह बताते हैं कि किस मोबाइल का अपराध दर्ज हुआ है, किसका नहीं दर्ज हुआ है? वसई लौह मार्ग पुलिस थाने के अंतर्गत आनेवाले रेलवे स्टेशन मीरा रोड, भाइंदर, नायगांव, वसई, नालासोपारा, विरार इस समय मोबाइल चोरों का हब बना हुआ है। लौह मार्ग पुलिस थाने के एक अधिकारी के मुताबिक एक साल में पश्चिम रेलवे के चर्चगेट से लेकर दहाणू तक १५ करोड़ रुपए का मोबाइल चोरी होने का रिकॉर्ड है, जिसका अपराध दर्ज होता है। ५ करोड़ के मोबाइल चोरी का रिकॉर्ड, मोबाइल का बिल न होना, बाहरी व्यक्ति, जो यहां आकर किसी काम के सिलसिले में रुका है उसका मोबाइल चोरी हुआ तो वह फिर कानून के पचड़े में पड़ने के डर से मामला ही दर्ज नहीं करवाता है।
(क्रमश:)