" /> मुंबई लौटे साढ़े पांच लाख मेहनतकश, जुलाई में और मजदूरों के लौटने की संभावना

मुंबई लौटे साढ़े पांच लाख मेहनतकश, जुलाई में और मजदूरों के लौटने की संभावना

लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद मुंबई सहित महाराष्ट्र में धीरे-धीरे रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। औद्योगिक कारखाने, विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं का काम शुरू होने सहित रोजगार की तलाश में फिर प्रवासी मजदूर मुंबई लौटने लगे हैं। रेलवे से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो कोराना के भय से गांव पहुंचे साढ़े पांच लाख मजदूर और व्यापारी वापस अपनी कर्मभूमि मुंबई लौट आए हैं। गौरतलब है कि पूरे महाराष्ट्र से ८४४ ट्रेनों से जून के पहले सप्ताह तक कुल १८ लाख श्रमिकों ने पलायन किया था। लगभग १० लाख लोगों ने मुंबई में बंद के दौरान अपने गृहनगर की यात्रा करने के लिए राज्य सरकार के पास पंजीकरण कराया था। इनमें से ७ लाख ने ट्रेन से और लगभग २ लाख ने परिवहन के अन्य तरीकों से यात्रा की। अब मुंबई आनेवाली ११ ट्रेनों के लिए उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में से ८ में २६ जून के बीच यात्रियों की संख्या १०० प्रतिशत से भी ज्यादा है। लोग वेटिंग टिकट खरीद रहे हैं। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर ने बताया कि १ जून से लेकर अब तक दो लाख से अधिक यात्रियों को मुंबई ले आए हैं। उन्होंने बताया कि जब विशेष ट्रेनें चलनी शुरू हुई थीं, तो हमारी ट्रेनें सिर्फ ७० प्रतिशत भरी थीं, लेकिन अब ज्यादातर ट्रेनों में यह लगभग १०० प्रतिशत सीटें बुक हैं। पश्चिम रेलवे से यूपी, बिहार, राजस्थान और गुजरात के लिए ट्रेनें चलाई जाती हैं। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने बताया कि इन दिनों कुल ३.५ लाख यात्री १५ विभिन्न मार्गों से मुंबई पहुंचे हैं। इनमें से २.५० लाख यात्री यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए हैं। मुंबई श्रमिकों की कमी का सामना कर रही है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट  अथॉरिटी (एमएमआरडीए) का कहना है कि देश के कई राज्यों के लोग जुलाई महीने में मुंबई पहुंच सकते हैं।
रिक्शा चालाकर जीवन यापन करनेवाले संतोष पांडेय ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान मेरी हालत खराब थी। इस पर अचानक मेरे पिताजी का देहांत हो गया और हमें गांव जाना पड़ा। हम ८ लोग ५० हजार रुपए की गाड़ी बुक करके गावं गए। जल्दी आने की उम्मीद नहीं थी। पर जब यहां रिक्शा चलने लगा तो हमें वापस आना पड़ा, आखिर हमारा रोजगार तो यहीं पर ही है। हम कामायनी ट्रेन से आए लेकिन कोई परेशानी नहीं हुई। एक निजी कंपनी में काम करनेवाले दीपक तिवारी ने बताया कि लॉकडाउन में उनकी कंपनी बंद थी। कुछ काम नहीं था इसलिए मैं गांव चला गया। फिर जून माह में कंपनी शुरू हुई। कंपनी ने फोन करके बुलाया और गुरुवार को कामायनी ट्रेन से चला आया।