मुंब्रा-दिवा में बिजली विभाग को ५१ प्रतिशत का घाटा

कलवा-मुंब्रा दिवा में विद्युत वितरण विभाग का निजीकरण किया जा रहा है। विरोध स्वरूप धरना-प्रदर्शन तथा अनशन का दौर जारी है। बिजली वितरण का काम निजी हाथों में क्यों दिया जा रहा है? इस पर चर्चा नहीं की जा रही है। वास्तविकता यह है कि मुंब्रा, शील तथा दिवा परिसर में जहां बिजली विभाग को ५१ प्रतिशत का हर महीने घाटा हो रहा है, वहीं कलवा में यह घाटा घटकर इस समय २५ प्रतिशत रह गया है। ५१ प्रतिशत के घाटावाले क्षेत्रों में बिजली विभाग प्रतिमाह ३० करोड़ मूल्य की बिजली की आपूर्ति करता है पर बिल अदायगी के रूप में विभाग को प्रतिमाह १४ से १५ करोड़ रुपए ही मिलते हैं।
चोरों के आगे लाचार अधिकारी
दिवा, शील तथा मुंब्रा में बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी होती है। कुछ जगहों पर बिजली की चोरी अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत से होती है तो वहीं कुछ जगहों पर छुपे तौर पर की जाती है। कार्यकारी अभियंता हुंडेकरी का कहना है कि बिजली चोरों को पकड़ने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती है। बिजली की चोरी कहां- कहां होती है? सब पता है पर हम उन पर किसी तरह की करवाई करने में असमर्थ हैं।
पुलिस का नहीं मिल रहा है सहयोग
बिजली चोरी को रोकने के लिए कानूनी कदम उठाना पड़ता है। अधिकारी तथा कर्मचारी बिजली चोरों को पकड़ते हैं और उनके विरुद्ध पुलिस थाने में चोरी का मामला दर्ज कराते हैं। चोरी का मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है और उससे दंड सहित बिल की वसूली की जाती है। हुंडेकरी का कहना है कि जब हम लोग बिजली चोरी की शिकायत करने के लिए मुंब्रा पुलिस थाने में जाते हैं तो चोरी का मामला दर्ज करने की बजाय पुलिस आरोपी को बुला लेती है और कुछ समय बाद उसे छोड़ देती है। पुलिस का कहना है कि स्टाफ की कमी है लिहाजा शिकायत दर्ज करवाने में मदद करने हेतु हम लोगों पुलिस थाने में एक स्टाफ रखा था पर सहयोग न मिलने की वजह से उसे वापस बुला लिया गया है।