" /> मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया वादा पूरा : उत्तर भारतीयों के रेल टिकट के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से दिए 85 करोड़

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया वादा पूरा : उत्तर भारतीयों के रेल टिकट के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से दिए 85 करोड़

महाराष्ट्र से 7 लाख, 38 हजार उत्तर भारतीय मजदूरों को भेजा गया उनके गृह राज्य
527 ट्रेने हुई रवाना, प्रतिदिन 100 ट्रेनों की मांग
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उत्तर भारतीय मजदूरों को वादा किया था कि उन्हें सुरक्षित उनके गृह राज्य भेजेंगे। उसी वादे के तहत अब तक महाराष्ट्र में विशेष रूप से मुंबई में उत्तर भारतीय श्रमिकों को उनके घरों में लौटने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कल 24 मई तक लगभग 7 लाख 38 हजार उत्तर भारतीय श्रमिकों को उनके घरों में वापस भेज दिया गया है। इसके लिए, महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से 527 विशेष श्रम गाड़ियों को रवाना किया गया। यह जानकारी गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दी। देश के विभिन्न हिस्सों के श्रमिक, जो तालाबंदी के कारण काम के लिए महाराष्ट्र फंस गए थे, अपने घरों तक पहुंचने के लिए पैदल ही निकल पड़े थे।  राज्य सरकार ने इन उत्तर भारतीय श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजने के लिए केंद्र से बड़ी संख्या में ट्रेनों की मांग की थी। शुरुआत में केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी थी लेकिन राज्य सरकार के बार-बार अनुरोधों को मंजूरी मिल गई। गौरतलब हो कि केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि लागत का 85 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा क्योंकि श्रमिकों के पास पैसा नहीं था। केंद्र सरकार को भी जल्द से जल्द यह फैसला देना चाहिए।  चूंकि इन उत्तर भारतीय श्रमिकों के पास पैसा नहीं है इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने शुरू में मुख्यमंत्री सहायता कोष से 54.75 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। इसके बाद इसे फिर से बढ़ाया गया है और अब तक श्रमिकों के टिकट के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 85 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं।  इन सभी उत्तर भारतीय श्रमिकों के लिए रेलवे स्टेशन पर लाने के लिए राज्य सरकार की बसों की भी व्यवस्था की गई है और उनके भोजन की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा की जा रही है। शुरुआत में बिहार और पश्चिम बंगाल तक ट्रेन से यात्रा करना मुश्किल था, वहां की राज्य सरकार एनओसी जारी नहीं कर रही थी। जिसके कारण ट्रेन की व्यवस्था नहीं की गई। राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद चंद्र पवार  और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फोन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ममता दीदी बनर्जी से चर्चा की। उसके बाद से अब उस राज्य में ट्रेनें भी जा रही है लेकिन पश्चिम बंगाल में चक्रवात के कारण वहां की ट्रेनों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
राज्य सरकार को इन उत्तर भारतीय श्रमिकों को उनके घरों में भेजने के लिए प्रतिदिन 100 ट्रेनों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने सभी तैयारियां की हैं और मांग भी की है कि केंद्र सरकार अधिक से अधिक संख्या में गाड़ियां उपलब्ध कराए। महाराष्ट्र से विभिन्न राज्यों में श्रमिकों को लेकर उत्तर प्रदेश में 281,
बिहार में 112, मध्यप्रदेश में 32, झारखंड में 27, कर्नाटक में 5, ओड़िशा में 15, पश्चिम बंगाल में 5, छत्तीसगढ़ में 5 सहित अन्य राज्यों में कुल 527 विशेष ट्रेनें महाराष्ट्र के विभिन्न भागों से श्रमिकों के लिए छोड़ी गई हैं, जिसमें से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल (सीएसएमटी) से 76, लोकमान्य तिलक टर्मिनल 74, पनवेल 35, भिवंडी 10, बोरीवली 37, कल्याण 7, पनवेल 35, ठाणे 21, बांद्रा टर्मिनल 42, पुणे 54, कोल्हापूर 23, सातारा 9, संभाजीनगर 11, नागपुर 14 इसके अलावा अन्य स्टेशनों से विशेष ट्रेनें छोड़ी गई हैं।