मुगलों की निशानी!, भाग्य तथा भाग्यनगर

तेलंगाना में भाजपा सत्ता में आई तो हैदराबाद का नाम भाग्य नगर करेंगे, ऐसा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है। निजाम की निशानियों को मिटाकर हैदराबाद का शद्धिकरण करना जरूरी है, ऐसा भी योगी का कहना है। योगी भगवा वस्त्रधारी हैं। इसलिए उनकी भूमिका साफ है। तेलंगाना में सत्ता आई तो ओवैसी भाइयों को हकाल देंगे, ऐसा भी उन्होंने घोषित किया है। तेलंगाना में निजाम की निशानियां हैं और ओवैसी भाई निजाम के वंशज होने जैसा व्यवहार करते हैं। इसलिए सरदार पटेल की ऊंची प्रतिमा खड़ा करनेवालों को निजाम की हलचल रोकनी चाहिए। पटेल ने पुलिस एक्शन के जरिए निजाम को घुटने टेकने को मजबूर किया था लेकिन हैदराबाद का मुस्लिम समाज आज भी निजाम के काल में तैर रहा है। ऐसा होने के बावजूद ओवैसी भाइयों तथा उनकी ‘एमआईएम’ दल की राजनीति भाजपा जैसे दलों के लिए फलदायी साबित होती है, ऐसा कहा जाता है। ओवैसी का इस्तेमाल कर राम मंदिर के बहाने देश में दंगा कराने की साजिश की पिचकारी मुंबई की एक राजनीतिक नेता ने मारी है। ओवैसी मतलब भाजपा का गुलाम होने का आरोप देश के अन्य दल भी लगाते हैं। ओवैसी के साथ अब प्रकाश आंबेडकर हैं। इसलिए उत्तर में तथा अन्य स्थानों पर कांग्रेस का नुकसान उसी तरह भाजपा का किस तरह लाभ होगा, इस तरह के गणित रखे जा रहे हैं। ऐसे में योगी द्वारा हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर करने की भूमिका महत्वपूर्ण है। मगर निजाम-बाबर की निशानियां सिर्फ हैदराबाद में ही हैं क्या? यह सवाल महत्वपूर्ण है। पूरे देशभर में हैं। हमारे मराठवाड़ा ने निजाम का अत्याचार बर्दाश्त किया है। इसलिए औरंगाबाद का संभाजीनगर, उस्मानाबाद का धाराशीव कब होगा? इसमें खुलताबाद और अहमदनगर भी हैं। योगी तेजी से निजाम और बाबर की निशानियां पोेंछते निकले हैं। उन्होंने फैजाबाद का अयोध्या तथा इलाहाबाद को प्रयागराज किया। उस पर भाजपा के मुस्लिम नेताओं के नाम भी बदल डालो, ऐसी टिप्पणी की गई। शाहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी के नाम का भी नामांतरण होगा क्या? ऐसा सवाल योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के एक मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने किया है। इस पर कई लोगों को हंसी छूट गई। योगी के राज में इन दिनों दंगा भड़क उठा है। गोहत्या की आशंका से भड़के दंगे में एक होनहार हिंदू पुलिस अधिकारी को आहुति देनी पड़ी। सैनिक और पुलिसवालों का धर्म नही होता। वे अपने कर्तव्य का निर्वाह करते रहते हैं। उसी तरह सत्ताधारी मतलब राजा को भी अपने कर्तव्य का पालन करना होता है। राजा कालस्य कारणम् अर्थात घटित होनेवाली हर बात के लिए राजा जिम्मेदार होता है। योगी ने मुगलों की निशानियों को मिटाने के लिए शहरों का नाम बदला मगर मूल सवाल हल करने के लिए वे तैयार नहीं। उनके सामने इतिहास के प्रश्न पत्र हैं और वे जवाब भूगोल का दे रहे हैं। सवाल हैदराबाद का भाग्यनगर कब होगा, यह नहीं है बल्कि अयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा? यह है। राम का वनवास कब खत्म होगा? यह बताओ। राम की किस्मत कब चमकेगी? उसे घोषित करो। मोदी भी इन सभी कामों को छोड़कर प्रधानमंत्री के रूप में चार राज्यों के प्रचार में उतरे हैं। योगी मुख्यमंंत्री के रूप में प्रचार में तोप दाग रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी दुकान बंद कर प्रचार का मोर्चा संभाल लिया है। जहां जाते हैं, वहां घोषणा तथा नामांतरण ही चल रहा है। योगी की एक सभा मराठवाड़ा में आयोजित करवाओ ताकि औरंगाबाद का संभाजीनगर तथा उस्मानाबाद का धाराशीव आसानी से हो जाए।