मुनाफे का साबित होगा मोनो का दूसरा चरण

एमएमआरडीए की बहुप्रतीक्षित योजनाओं में से एक मोनो रेल का पहला चरण साल २०१४ में शुरू हुआ था। योजना के मुताबिक मोनो का पहला चरण अब तक राज्य सरकार के लिए घाटे का साबित हुआ है। इसी बीच कल से मोनो के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई। एमएमआरडीए के अधिकारियों और मुंबईकरों की मानें तो अब तक घाटे में चलनेवाली मोनो रेल अपने दूसरे चरण में मुनाफे की साबित होगी।
बता दें कि मोनो का दूसरा चरण मुनाफे का साबित होगा, इसकी कई वजह हैं। पहली वजह मोनो का दूसरा चरण जीटीबी नगर से संत गाडगे महाराज चौक तक है। ११.२८ किमी का यह कॉरिडोर रिहायशी इलाकों से होकर गुजर रहा है। जिन इलाकों से मोनो रेल गुजर रही है वहां कमर्शियल केंद्र, कॉरपोरेट ऑफिस, अस्पताल आदि की सुविधाएं हैं। ऐसे में पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण के शुरू होने पर अधिक यात्री मोनो रेल सेवा का लाभ उठाएंगे। एमएमआरडीए के अधिकारियों का कहना है कि चेंबूर से वडाला के बीच पहला चरण जहां से गुजरता था, वहां पर फर्टिलाइजर फैक्ट्री सहित काम आबादीवाले इलाके हैं। पहले चरण की मोनो से रोजाना १५ हजार यात्री सफर करते हैं। दूसरा चरण शुरू होने पर रोजाना मोनो रेल की यात्री संख्या शुरुआत में २ लाख के करीब होने का अनुमान है। इस मार्ग पर यात्री संख्या बढ़ने से मोनो का यह दूसरा चरण मुनाफे का साबित होगा क्योंकि दूसरा चरण जीटीबी नगर, अंटॉप हिल, आचार्य अत्रे नगर, वडाला ब्रिज, दादर-पूर्व, नायगांव, आंबेडकर नगर, मिंट कॉलोनी, लोअर परेल, संत गाडगे महाराज चौक जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा, जो कि घनी आबादीवाला इलाका है। ऐसे में यहां यात्री संख्या अधिक होने की उम्मीद है।
लोअर परेल निवासी संजय सुर्वे का कहना है कि मोनो के दूसरे चरण के शुरू होने का हम लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मोनो सेवा शुरू होने से मैं महज ५ मिनट में अपने घर पहुंच सकता हूं। हमारा परिवार और आसपास के इलाके के लोग एक दशक से इसके शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।