मुन्ना बजरंगी और मैं

पूर्वांचल का मशहूर बदमाश मुन्ना बजरंगी और मैं एक ही जिले के हैं। जौनपुर के जिस क्षेत्र में उसका गांव है उसी के बगल में मेरा भी गांव है। उसने बड़े-बड़े करिश्मे किए हैं। ४० से ज्यादा लोगों की हत्याएं की। हजारों लोगों से रंगदारी वसूली और करोड़ों अरबों रुपए कमाए, मैं कुछ भी न कर सका। कल बाघपत जेल में बदमाश सुनील राठी ने गोलियां मारकर उसे हमेशा की नींद सुला दिया, लेकिन हमारे पूर्वांचल में उसकी मौत पर जो हलचल मची है, वह अभूतपूर्व है। हजारों लोग गांव में खड़े होकर उसके शव का इंतजार कर रहे हैं। कई लोग आंसू बहा रहे हैं। कोई छाती पीट रहे हैं, कुछ सरकार को कोस रहे हैं, कुछ बदला लेने की कसमें खा रहे हैं और यह सब किसी सीमा पर शहीद हुए जवान के लिए नहीं बल्कि एक जरायम पेशा अपराधी के लिए हो रहा है। यह देखकर मेरे मन में भी दुख का सागर हिलोरे ले रहा है। मेरी ही उम्र का मुन्ना बजरंगी इतना सब कुछ कर गया और मैं वहीं का वहीं रह गया। मुन्ना बजरंगी ने उसी वातावरण में आंखें खोली जहां मैंने खोली थी। वह भी उन्हीं विद्यालयों में गया जहां मैं गया था। उसने भी उसी हवा में सांस ली जिसमें मैंने ली थी। फिर वह इतना आगे बढ़ गया और मैं इतना पिछड़ा हुआ क्यों रह गया? अगर मैं भी किसी बाहुबली अपराधी की छत्रछाया में आ जाता तो आज मेरे भी नाम का डंका बज रहा होता। लोग मेरे लिए भी जान देने और लेने को तैयार हो जाते। यहां तो मोहल्ले का दूधिया भी मुझे नहीं पहचानता है। मेरा मानव जन्म अकारथ गया। मेरे जीवन में कोई उल्लेखनीय घटना नहीं घटी। आम हिंदुस्थानी की तरह मैंने समय पर विवाह कर लिया और अपने परिवार की गाड़ी गधे की तरह खींचता हूं। ईश्वर बड़ा निष्ठुर है उसने मेरे साथ न्याय नहीं किया। मेरे भीतर बड़ा गैंगस्टर बनने की सारी संभावनाएं मौजूद थीं लेकिन मुझे मौका नहीं दिया।