मुन्नी बनी शबाना

लोग कहते हैं कि नाम में क्या रखा है? कहनेवाले यह भूल जाते हैं कि इंसान चला जाता है लेकिन उसका नाम अमर हो जाता है। हम अपने बच्चों को प्यार से चिंटू, डब्बू, चिंपू, मिंटू, मुन्ना, गुड्डी, मुन्नी आदि नाम रख देते हैं। हम भूल जाते हैं कि कल यही बेटा-बेटी बड़े होकर पढ़-लिख कर जब बड़े ओहदों पर बैठेंगे और उन्हें लोग बचपन के नाम से पुकारेंगे तो उन्हें कैसा लगेगा? जाहिर है कि उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।
फिल्मी दुनिया में कई अभिनेता-अभिनेत्रियों ने अपने बचपन के नाम बदलकर रखे गए उपनामों से ही बहुत ख्याति प्राप्त की है, वे अपने उपनामों से विश्व में प्रसिद्ध हुए हैं। फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी का बचपन का नाम ‘मुन्नी’ था। उत्तर प्रदेश आजमगढ़ के रहनेवाले प्रसिद्ध कवि-शायर वैâफी आजमी तथा मां शौकत के घर १८ सितंबर १९५० में एक बच्ची का जन्म हुआ। मां-बाप ने उस लड़की का नाम मुन्नी रखा। मुन्नी बड़ी हो रही थी। मां-बाप को भी नहीं पता था कि हमारी यह छोटी-सी मुन्नी कल फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्री बनकर देश-विदेश में नाम कमाएगी। अब मुन्नी स्कूल जाने लगी। एक दिन कैफी आजमी के घर देश के मशहूर शायर अली सरदार जाफरी आए। मां शौकत ने अपनी बेटी मुन्नी से कहा- मुन्नी अंकल के लिए पानी लाओ। मुन्नी पानी लेकर आ गई। फिर मुन्नी जरा चाय बना देना। हर बात पर ‘मुन्नी-मुन्नी’ कहना जाफरी को पसंद नहीं आया। उन्होंने कैफी आजमी से कहा कि क्या मुन्नी-मुन्नी लगा रखा है। कोई ढंग का नाम रखने को नहीं मिला क्या? आजमी ने कहा कि आप ही कुछ अच्छा नाम सुझाओ। जाफरी ने कई नाम सुझाए लेकिन मां-बाप को वे पसंद नहीं आए। अंत में जाफरी ने कहा कि ‘शबाना’ कैसा रहेगा? दोनों को यह नाम पसंद आ गया, तभी से मुन्नी ‘शबाना’ बन गई।
फिल्म अभिनेत्री शबाना आजामी ने अर्थ, देवता, स्वामी, परवरिश, अवतार, थोड़ी सी बेवफाई, अंजुमन, टूटे खिलौने, लहू के दो रंग, आधा दिन-आधी रात, अमर-अकबर-अंथोनी, अपने-पराए, नसीहत, भावना, अनोखा बदन जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया है।