मुर्दे फुल, कब्रें गुल!

देश की बढ़ती जनसंख्या का असर मुंबई पर भी पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि सड़क से लेकर रेलवे तक लोगों से खचाखच भरी हुई दिखती है। दूसरी ओर मुंबई की विस्फोटक जनसंख्या के कारण कब्रिस्तान का हाल भी बेहाल हो चुका है। जनसंख्या बढ़ोत्तरी के साथ मृत्युदर का अनुपात भी बढ़ा है। ऐसे में कब्रगाह में दफनाने के लिए कब्रें भी कम पड़ने लगी हैं। ऐसा ही नजारा पूर्वी उपनगर में देखने को मिल रहा है। पूर्वी उपनगर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके गोवंडी में मुर्दों के लिए कब्रें गुल हो गई हैं। हाल ही में शुरू हुआ रफीनगर कब्रिस्तान महज चार महीनों में मुर्दों से फुल हो गया है। छह लाख आबादीवाले इस इलाके में यह तीसरा कब्रिस्तान है, जहां मुर्दों के लिए कब्रें गुल हो गई हैं।
बता दें कि मुंबई में मनपा की १३ और निजी ५७ मुस्लिम कब्रिस्तान हैं। बढ़ती जनसंख्या के चलते कब्रिस्तान की भी मांग मुस्लिम समाज निरंतर कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्वी उपनगर के गोवंडी स्थित रफीनगर इलाके में अप्रैल माह में नया कब्रिस्तान शुरू किया गया। शुरू से ही विवादों में घिरे इस कब्रिस्तान को आनन-फानन में आधा ही शुरू किया गया। ६०० की क्षमतावाले इस आधे कब्रिस्तान में अब तक ५०० शव दफन हो चुके हैं। शेष बची कब्र आगामी सप्ताह में मुर्दों से फुल हो जाएगी। इसके चलते एक बार फिर यहां मुर्दों को दफनाने की समस्या उत्पन्न हो जाएगी क्योंकि सबसे बड़ा देवनार कब्रिस्तान मुर्दों से फुल होने के कारण पहले ही बंद हो चुका है। शिवाजीनगर से ही महज ५०० मीटर की दूरी पर एक और कब्रिस्तान है, वह भी लगभग फुल हो चुका है। हालांकि रफीनगर कब्रिस्तान के आधे भूखंड पर डेब्रिज डंप होने से इसे हटाकर यहां मरुम मिट्टी भरने के लिए मनपा प्रशासन जल्द ही निविदा निकालनेवाला है, जिसके बाद कब्रिस्तान की समस्या एक हद तक समाप्त हो जाएगी।