" /> मुस्लिम बंधुओं ने पेश की इंसानियत की मिसाल : हिंदू रीति-रिवाज से हुआ महिला का अंतिम संस्कार

मुस्लिम बंधुओं ने पेश की इंसानियत की मिसाल : हिंदू रीति-रिवाज से हुआ महिला का अंतिम संस्कार

कल्याण में मुस्लिम समाज ने जाति-धर्म और मजहब को दरकिनार कर इंसानियत की मिसाल पेश की है। भोईवाड़ा (कल्याण) की रहनेवाली 70 साल की एक बुजुर्ग महिला प्रभा कलवार वैसे तो दो बच्चे की मां थीं लेकिन मरते वक्त उनके पास उनका अपना कोई नहीं था। कल रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। ऐसे में बीमार वृद्धा को पहले तो उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने अस्पताल पहुंचाकर इलाज कराने की कोशीश की लेकिन पड़ोसियों की कोशीश नाकाम सिद्ध हुई। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने पर धर्म की परवाह किए बिना वृद्धा का अंतिम संस्कार हिंदू रिवाजों के अनुसार करवाकर एक नायाब मिसाल पेश की।
बताया जाता है कि प्रभा जब दर्द से बेहाल हुई तो उन्होंने पड़ोस में रहनेवाले शाकीर भाई शेख को बुलाया। शाकीर शेख अपने कुछ दोस्तों के साथ बुजुर्ग महिला के घर आए, उनकी खराब हालत को देखते हुए तुरंत रिक्शा कर उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन अस्पताल तक पहुंच पाते उसके पहले ही प्रभा की मौत हो गई। अंतिम संस्कार करने के लिए प्रभा का यहां पर कोई नहीं था। मृतका प्रभा कलवार के दो लड़कों में से एक लड़का महेश नासिक में रहता है, उसे फौरन फोन पर सूचना दी गई। इसके बाद शाकीर शेख ने अपने दूसरे हिंदू मित्रों के सहयोग से हिंदू-रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार का सारा सामान इकट्ठा किया और बेटे महेश के आने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर कल्याण के बैलबाजार स्थित श्मशान भूमि में हिंदू रीति-रिवाज से प्रभा का अंतिम संस्कार करने में मदद की।