मेट्रो: आसान यात्रा का मुश्किल मार्ग

कहा गया है कि किसी भी शहर का विकास उस शहर की यातायात व्यवस्था को देखकर तय किया जाना चाहिए। आज से ५ साल पहले जब ८ जून २०१४ को मुंबई में मेट्रो की शुरुआत हुई थी तब ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन के आगे मेट्रो की कुछ चल पाएगी। जाहिर सी बात है आज मुंबई की मेट्रो-वन जिस रूट पर दौड़ रही है, उस रूट पर लोकल ट्रेन की कनेक्टिविटी नहीं थी। घाटकोपर से यदि किसी यात्री को वर्सोवा जाना होता था तो उसे दादर से लोकल ट्रेन बदलकर अंधेरी जाना पड़ता था। बस के मुकाबले लोकल का सफर आसान था क्योंकि बसों की प्रâीक्वेंसी कम होने के चलते घाटकोपर से वर्सोवा की दूरी सड़क या फिर ऑटोरिक्शा से तय करने में घंटो लग जाते थे। मुंबई की पहली मेट्रो का परिचालन जब इस रूट पर शुरू हुआ तो सबसे बड़ी राहत वर्सोवा से घाटकोपर के यात्रियों के लिए थी। आज वर्सोवा से घाटकोपर का सफर मेट्रो से महज २१ मिनटों में तय कर पाना संभव हो गया है। आज मुंबई में २५० किमी से अधिक का मेट्रो जाल बिछाया जा रहा है। लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए मुंबई में सभी मेट्रो एक दूसरे से कनेक्ट होगी। देश में पहली मेट्रो रेल की शुरुआत पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में १९८४ में हुई। देश की आर्थिक राजधानी होने के चलते मुंबई जैसे शहर में मेट्रो को कई दशक पहले ही आ जाना की जरूरत थी लेकिन तत्कालीन सरकार में बैठे कांग्रेस के मंत्रियों ने इसकी सुध नहीं ली। `देर आए दुरुस्त आए’ की तर्ज पर २००४ में मेट्रो की योजनाएं तो बनीं लेकिन ये सारी योजनाएं लालफीताशाही में लटकी रहीं। आज मेट्रो के मामले में हम कई गुना पीछे हैं लेकिन जिस गति से मुंबई में चरणबद्ध तरीके से मेट्रो का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू है, उससे एक बात साफ है कि देरी से शुरू हुई मेट्रो परियोजना जब अंतिम रूप लेकर २०२१-२२ में यात्री सेवा में शामिल होगी तो हम कई दशकों की देरी से मुंबई पहुंची मेट्रो की खाई को पाटने में कुछ हद तक सफल जरूर होंगे। आज मेट्रो वन का परिचालन वर्सोवा- अंधेरी- घाटकोपर के ११.४० किमी रूट पर बड़े ही सुचारू ढंग से चल रहा है। फिलहाल मेट्रो-१ कुछ हद तक पूर्व से पश्चिम को कनेक्ट करने में कामयाब हुई है। हालांकि मुंबई के ऐसे कई इलाके हैं जहां पहुंचने के लिए लोगों को लोकल बदलनी पड़ती है। मेट्रो सिस्टम पैसेंजर प्रâेंडली होने के चलते इसकी लोकप्रियता बढ़ते जा रही है जिससे मुंबई की पहली मेट्रो यात्रियों के बीच हिट साबित हुई है। फिलहाल मेट्रो-१ में रोजाना ४४० सेवाएं संचालित हो रही हैं जबकि रोजाना मेट्रो-१ से सफर करनेवाले यात्रियों की संख्या करीब ४ लाख ४० हजार है। वर्सोवा- अंधेरी- घाटकोपर मेट्रो रूट पर रोजाना ८० हजार यात्री बैठकर सफर करते हैं जबकि ३ लाख ६० हजार यात्री खड़े होकर सफर करते हैं। फिलहाल मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ने से इस रूट पर व्यस्ततम समय में यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। यदि सुबह और शाम के व्यस्ततम समय में मेट्रो की सेवाएं बढाई जाएं तो इस दौरान सफर करने वाले यात्रियों को काफी सहूलियत होगी। वतर्मान समय मे मुंबई विकास के स्तर पर आगे बढ़ रही है। यातायात के कई साधनों को अमल में लाया जा रहा है। ट्रैफिक समस्या से निजात पाने के लिए मुंबई में करीब ३०० किमी से अधिक का मेट्रो जाल बिछाया जा रहा है। इस कड़ी में कोलाबा-बांद्रा-सीप्ज मेट्रो-३ काफी आगे है। मेट्रो-३ अंडर ग्राउंड होने के साथ ही इसका निर्माण कार्य काफी तेज गति से हो रहा है। अंडरग्राउंड मेट्रो की करीब ६३ प्रतिशत के टनल की खुदाई हो चुकी है जबकि इस परियोजना का कुल काम ४८ प्रतिशत हो चुका है। मेट्रो-२ए दहिसर से डीएन नगर और मेट्रो-७ अंधेरी ईस्ट से दहिसर ईस्ट का काम भी लगभग ७० प्रतिशत पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि मेट्रो-३, मेट्रो-२ए और मेट्रो-७ का परिचालन की शुरुआत कुछ महीनों के आगे पीछे ही की जाएगी। मुंबई में कुल १४ मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण होना है। मुंबई मेट्रो कॉरिडोर एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर को कनेक्ट करेगी। ऐसे में मुंबई के किसी भी कोने में मेट्रो की बदौलत पहुंच पाना आसानी से मुमकिन होगा।