मेट्रो के खौफ में `मेहर’

माहिम में मेट्रो-३ के कार्य से एक और इमारत में दरार पड़ गई है। रविवार रात माहिम स्थित मेहर मंजिल इमारत की दीवारों में दरारें पड़ गर्इं, फिर एक बार माहिमवासी भयभीत हो गए हैं। इससे पहले बीते सप्ताह ही माहिम की एक इमारत में दरारें पड़ गई थीं।
रविवार को माहिम की मेहर मंजिल नामक इमारत में दरार आने से यहां के निवासियों की रात खौफ में बीती। यह दरार भी कुलाबा-बांद्रा-सीप्ज मेट्रो-३ परियोजना के कार्य के चलते आ गई थी। इस कारण सोमवार को स्थानीय निवासियों ने एमएमआरसीएल के अधिकारियों से संपर्क कर इमारत में दरार पड़ने की शिकायत की, जिसके बाद अधिकारियों ने रॉड्स लगाकर इमारत को सहारा दिया है।
इससे पहले १० नवंबर को एक ६० साल की इमारत लक्ष्मी निवास में दरारें पड़ गई थीं। इस इमारत में रात को अचानक खिड़कियां खड़कने लगी और जमीन कांपने लगी। सुबह उठकर जब लोगों ने देखा तो पाया कि इमारत के नीचे की दुकान का शीशा टूटकर गिर गया है और इमारत के कई हिस्सों में दरारें आ गई थीं। जिसके बाद लोगों को कुछ समय के लिए इमारत खाली करवाकर होटल में स्थानांतरित कर दिया गया। रविवार को दोबारा मेहर मंजिल की दीवारों में दरार पड़ गई, अब मेहर मंजिल के लोग अपनी सुरक्षा के लिए एमएमआरसीएल से लिखित आश्वासन मांग रहे हैं। मेहर इमारत ४ मंजिला है और लगभग ८० साल पुरानी है। इस इमारत में १० परिवार रहते हैं। इमारत के निवासियों का कहना है कि एमएमआरसीएल को सुरक्षा के लिहाज से हमें कोई अन्य जगह उपलब्ध करवानी चाहिए। निवासी अब एमएमआरसीएल से इमारत के सुरक्षित होने का लिखित पत्र मांग रहे हैं। एक निवासी ने बताया कि भले एमएमआरसीएल हमें सहयोग कर रही है लेकिन यहां रहना खतरे से कम नहीं।

एमएमआरसीएल के अधिकारियों द्वारा हमें आश्वस्त किया गया है कि हम यहां सुरक्षित हैं लेकिन हम चाहते हैं कि यह हमें लिखित दिया जाए।
आसिफ हुसैन

मेट्रो के कार्य के कारण इमारत की दीवारोेंं में दरार पड़ रही है, जिससे इमारत दिन-ब-दिन कमजोर हो रही है इसलिए यहां पर रहनेवाले परिवार खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे।
लैला डियास (निवासी)