मेट्रो ने किया टैक्सी का धंधा मंदा

काली-पीली टैक्सियों को रोजाना नई-नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले कूल कैब व मेरु से चुनौतियां मिलीं, बाद में ओला और उबर जैसी निजी टैक्सी कंपनियों ने इनकी रही-सही कमर भी तोड़ कर रख दी। इन चुनौतियों का सामना कर रहीं काली-पीली टैक्सियों का रहा-सहा धंधा अब मेट्रो के काम ने मार दिया है। टैक्सीवालों का कहना है कि मेट्रो कार्य के कारण उन्हें अब लंबी दूरी का भाड़ा मिलना लगभग बंद हो गया है, जिससे काली-पीली टैक्सी पहले की अपेक्षा अब और भी बेसहारा हो गई हैं।
बता दें कि मेट्रो के काम से मुंबई की सड़कों पर होनेवाले ट्रैफिक का असर काली-पीली टैक्सियों पर भी पड़ा है। मेट्रो कार्य के कारण चार लेन की सड़कें दो लेन में तब्दील हो गई हैं। इसका असर ट्रैफिक पर पड़ रहा है और गाड़ियां कई किमी लंबे जाम में घंटों फंस कर रह जा रही हैं। मुंबई टैक्सीमेन्स यूनियन के महासचिव एएल क्वाड्रोस ने बताया कि मुंबई में ट्रैफिक जाम और मेट्रो के काम के कारण काली-पीली टैक्सी के लंबी दूरी के भाड़े में लगभग २० फीसदी कमी दर्ज हुई है। क्वाड्रोस के अनुसार लंबी दूरी का धंधा मंदा होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण मुंबई में मेट्रो का काम और ट्रैफिक है। टैक्सी की बजाय अब लोग लोकल ट्रेन से सफर करते हैं।
ऐसे में लोकल ट्रेन में भी अब भीड़ बढ़ने लगी है। पश्चिम रेलवे से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार साल २०१७ के अगस्त महीने में लोकल ट्रेन से १० करोड़ ३९ लाख यात्रियों ने सफर किया था और रेलवे की कमाई ६०.५५ करोड़ रुपए हुई थी, जबकि २०१८ के अगस्त महीने में सफर करनेवाले यात्रियों की संख्या बढ़कर ११ करोड़ ७० लाख हो गई, वहीं रेलवे की कमाई भी बढ़कर ६५.८७ करोड़ रुपए हो गई। यानी साल २०१७ की अपेक्षा साल २०१८ के अगस्त महीने में ६.५१ प्रतिशत यात्रियों की वृद्धि के साथ-साथ रेलवे की कमाई में भी ८.८ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।