मेट्रो पी गई पारसियों के हिस्से का पानी, टनल ने कट की सप्लाई लाइन

मेट्रो टनल की खुदाई पारसी समुदाय के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। पारसी टेंपल पर होनेवाले टनल खुदाई के असर से जुड़ी समस्या अभी हल भी नहीं हुई थी कि एक बार फिर टनल की खुदाई पारसियों के लिए चिंता का कारण बन गई है। मेट्रो-३ के टनल की खुदाई के कारण पारसियों के हिस्से का पानी मेट्रो पी रही है। दरअसल १०० साल से भी अधिक पुराने कुओं का जलस्तर गिरता जा रहा है, इसकी वजह अंडर ग्राउंड टनल की खुदाई है। पारसी समुदाय की मानें तो टनल की खुदाई का असर जलीय चट्टान पर्त पर पड़ रहा है। ऐसे में टनल पानी की सप्लाई लाइन कट कर रही है।
बता दें कि जहां-जहां मेट्रो-३ के टनल की खुदाई हो रही है, वहां आस-पास के इलाकों में मौजूद कुओं के पानी का जलस्तर घटता जा रहा है। इसकी शिकायत पारसी समुदाय ने की है। पारसी समुदाय का कहना है कि वाड़ियाजी अताश बेहराम के आस-पास १०० साल पुराना कुआं है। इस कुएं के पानी का इस्तेमाल करीम मंजिल, सिंगापुरी सुखाड़वाला बिल्डिंग के लोग करते हैं। पारसी अगियारी (टैंपल) में भी कुएं है इस पर भी टनल की खुदाई का असर पड़ा है। यह खुदाई जगन्नाथ शंकर शेठ रोड के पास हो रही है। पोरस मरोलिया का कहना है कि जब पानी की कटौती होती है तो उस दौरान कुएंं के पानी का इस्तेमाल हम करते हैं। पहले मोटर से पानी कुआं से खिंचते थे तो लगभग २ घंटे तक पानी मिलता था लेकिन अब आधा घंटे भी पानी मोटर से नहीं मिलता है। ऐसे में अब कुएं के पानी का जल स्तर कम होने से पारसी समुदाय टैंकर के पानी का सहारा लेने को मजबूर हो गया है। प्रत्येक ट्रिप के ४०० रुपए पानी के देने होते हैं। टैंपल के ट्रस्टी होजी दस्तूर का कहना है कि टैंपल के कुएंं का पानी कम होने से इसका असर पूजा-पाठ पर भी पड़ रहा है। कुएं के पानी का इस्तेमाल यहां के निवासी कपड़ा धोने सहित बर्तन मांजने आदि के लिए करते हैं, वहीं शोधकर्ता नेहा भावे का कहना है जब भी भू-भाग के नीचे टनल की खुदाई की जाती है तो इसका असर जलीय चट्टान पर्त पर पड़ता है, जिससे पानी के स्त्रोत में कमी हो जाती है।