" /> मेडल का क्या करूं?

मेडल का क्या करूं?

झारखंड की राजधानी रांची के कांके में एक ऐसी प्रतिभा रहती है, जो कराटे में सिर्फ ब्लैक बेल्ट ही नहीं बल्कि नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अपनी राजधानी में रहने वाली यह प्रतिभा की धनी खिलाड़ी मजबूरी और बेबसी में जिंदगी गुजार रही है। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण विमला जैसी नेशनल प्लेयर आज हडिया (राइस बियर) बेच कर अपना और अपने परिवार का ख्याल रख रही हैं। विमला मुंडा वैसे तो साल २००८ से ही टूर्नामेंट खेल रही हैं। इसी साल डिस्ट्रिक्ट लेवल पर इन्होंने मेडल अपने नाम किया था। इसके बाद २००९ में ओडिशा में भी पदक विजेता रहीं। ३४वें नेशनल गेम्स में विमला ने सिल्वर मेडल जीत कर राज्य का मान बढ़ाया तो वहीं अक्षय कुमार इंटरनेशनल कराटे चैम्पियनशिप में इन्होंने दो गोल्ड मेडल जीत कर अपना और अपने राज्य का नाम रौशन किया। इस तरह के सैकड़ों मेडल विमला ने अपने नाम किए हैं। विमला अपने मेडल और सर्टिफिकेट देखकर भावुक हो जाती हैं। कहती हैं पहले पूरे दिन सिर्फ अपने मेडल और सर्टिफिकेट को ही निहारती रहती थी.. लेकिन जैसे सच्चाई से सामना होता गया मैंने अपने सभी मेडल और सर्टिफिकेट बक्से में रख दिए हैं।