" /> मेडिक्लेम की मचमच!, अस्पताल पर चला एफडीए का डंडा

मेडिक्लेम की मचमच!, अस्पताल पर चला एफडीए का डंडा

बीमारी के दौरान अचानक लगनेवाले भारी खर्च से बचने के लिए लोग मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदते हैं। पहले मेडिक्लेम पॉलिसी धारक अस्पताल को इलाज के पैसे अदा करता था बाद में बीमा कंपनी उसे अस्पताल द्वारा दिए गए बिल के हिसाब से पैसों का भुगतान करती थी। प्राय: पॉलिसी धारकों पर अस्पताल प्रशासन से मिलकर बीमा कंपनियों को चूना लगाने का आरोप लगता था, जिसके कारण बीमा कंपनियों ने पॉलिसी धारकों के नकद भुगतान की व्यवस्था को खत्म कर दिया लेकिन अब अस्पताल और मेडिक्लेम पॉलिसी धारक दवाइयों के बिल में गड़बड़ी करके बीमा कंपनियों को चूना लगा रहे हैं। इसका खुलासा हाल ही में मुलुंड के एक अस्पताल द्वारा बीमा कंपनी के समक्ष भुगतान के लिए किए गए क्लेम मामले में हुआ है।
बता दें कि बांद्रा-पूर्व के बीकेसी स्थित एफडीए कार्यालय में तैनात जोन-४ के ड्रग्स इंस्पेक्टर शरदचंद्र कृष्णराव नांदेकर को अस्पतालों द्वारा औषधियों के बिल में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान मुलुंड-पश्चिम के एमजीएम रोड स्थित एक निजी अस्पताल द्वारा मेडिक्लेम वैâशलेस के तहत जिन मरीजों का इलाज किया गया था। उन मरीजों की औषधियों के बिल में गड़बड़ी पाई गई। अस्पताल ने २७,५६,८०५ रुपए की दवाइयों का बिल जमा कराया था। ये बिल जिन दवा विक्रेताओं के नाम पर बने थे। उन दवा विक्रेताओं के रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। अर्थात अस्पताल ने फर्जी बिल बीमा कंपनी में जमा कराया था। एफडीए अधिकारियों ने अस्पताल व दवा विक्रेता के खिलाफ मुलुंड पुलिस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है।