मेमोरी खल्लास! रोज ३४ मरीजों में हो रहा है याददाश्त का लोचा

क्या आपकी स्मरण शक्ति कमजोर होती जा रही है? आपको सोचने में कठनाई आ रही है? आपका दिमाग समस्याओं को नहीं सुलझा पा रहा है? क्या उक्त समस्या के कारण आपके दैनिक कार्यों पर असर पड़ रहा है? यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है तो सावधान हो जाइए आप डिमेंशिया सिंड्रोम यानी स्मृतिभ्रंश (रोग में अनेक लक्षणों का एक साथ होना) से जूझ रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्या को ध्यान में रखकर राज्य के ३० जिलों में मेमोरी क्लिनिक की शुरुआत की गई। आपको जानकर हैरानी होगी कि महज ३० दिन में २८ जिलों की क्लिनिक में रोजाना आ रहे लोगों में से औसतन ३४ लोगों में याददाश्त का लोचा हो रहा है। डॉक्टरों द्वारा जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि रोजना ३४ लोगों की मेमोरी खल्लास हो रही है। इस संदर्भ में महाराष्ट्र मेंटल हेल्थ के पूर्व उपनिदेशक व थाने मेन्टल हॉस्पिटल के पूर्व  सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय कुमावत ने बताया कि ‘चिंता का विषय यह है कि खासकर वृद्धों में होनेवाली स्मृतिभ्रंश की समस्या अब वयस्कों में भी हो रही है। इसके कई कारण हैं जैसे नशा शराब का सेवन, धूम्रपान, तनाव, पौष्टिक आहार की कमी व अनियमित जीवनशैली जिससे यह समस्या बढ़ापे में उत्पन्न होने के बजाय अब कम उम्र के लोगों में बढ़ रही है।
भेजे के प्रोटीन ने परेशान किया रे…
स्मृतिभ्रंश एक ऐसी बीमारी है जिससे मस्तिष्क में ऐसे प्रोटीन का निर्माण होने लगता है जो कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देता है, जिसे कह सकते हैं कि भेजे के प्रोटीन ने परेशान कर दिया है।
बता दें कि २ अक्टूबर २०१८ से ३० जिलों में मेमोरी क्लिनिक की शुरुआत की गई। जिसमें मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, ठाणे, जलगाव, सातारा, सांगली, नगर, अमरावती, नांदेड, बीड, सोलापुर, सिंधुदुर्ग और लातूर का भी समावेश है। इस संदर्भ में राज्य स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) के निदेशक डॉ. संजीव कांबले ने बताया कि मेमोरी क्लिनिक के शुरू होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी जांच करवाई। ३० में से २८ जिलों में ३० दिन में १ हजार २८ लोगों में स्मृतिभ्रंश की बीमारी होने की बात सामने आई। इन सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डॉ. संजय ने बताया कि स्मृतिभ्रंश कई प्रकार की होती है। जिसमें से एक रिवर्सेबल और दूसरा इरर्रिवर्सिबल है। कुछ रोग इलाज से ठीक हो सकते हैं व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है और उसके डिमेंशिया के लक्षण पूरी तरह से चले जाते हैं। इसे रिवर्सिबल डिमेंशिया कहते है। बाकी रोग (जिनके कारण डिमेंशिया होता है) लाइलाज हैं। इन्हें इरर्रिवर्सबिल डिमेंशिया कहते हैं। इलाज से इनमें से कुछ रोगों के प्रकट लक्षण तो कम हो सकते हैं, पर रोग मूल रूप से ठीक नहीं हो पाता क्योंकि मस्तिष्क में एक ऐसे प्रोटीन का निर्माण होता है जो अच्छी कोशिकाओं पर ही हमला कर देते हैं। ऐसे में जो हानि हो चुकी है उसे दवाई से ठीक नहीं किया जा सकता है और दवाई का फोकस होता है प्रकट लक्षणों को कम करना और आगे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट होने बचाना।