" /> ‘मेरा कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है!’

‘मेरा कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है!’

फिल्म ‘बेबी’ में अक्षय कुमार की पत्नी का रोल निभानेवाली मधुरिमा तुली से दर्शक अपरिचित नहीं हैं। ‘हमारी अधूरी कहानी’, ‘नाम शबाना’, ‘कालो’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरनेवाली मधुरिमा ने छोटे पर्दे पर ‘चंद्रकांता’ सहित ‘नच बलिए-९’, ‘बिग बॉस’, ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे रियलिटी शोज में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। सोनी लिव के वेब शो ‘अवरोध’ में मधुरिमा ने एक तेज-तर्रार पत्रकार की भूमिका निभाई है। पेश है मधुरिमा तुली से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 लॉकडाउन के दौरान आपने क्या कुछ सीखा?
लॉकडाउन के दौरान मैंने धैर्य रखना सीखा। शायद हमारे बीच संयम या यूं कहें कि धैर्य की कमी हो चुकी है। जीवन में धैर्य रखना हम सबके लिए बेहद जरूरी है। खैर,
लॉकडाउन के दौरान मैंने वो सब किया जिसके लिए मैं पहले कभी टाइम नहीं निकाल पाई थी।

 वेब शो ‘अवरोध द सीज विद इन’ को करने के पीछे क्या वजह रही?
मैंने ये शो इसीलिए किया क्योंकि ये शो आर्मी को फोकस करता है। उरी में जो सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था वो हर देशवासी के लिए रोमांचक और फख्र महसूस करनेवाली घटना थी। ये वेब शो उसी घटना पर आधारित है जो हमारे शूरवीरों को ट्रिब्यूट देता है। जब कहानी, किरदार और साथ में काम करनेवाले कलाकार सभी धुरंधर हों तो भला कोई इसे करने से कैसे इंकार करेगा।

 आपने जर्नलिस्ट का किरदार निभाने के लिए क्या तैयारियां कीं?
मैंने अखबारों से लेकर टीवी चैनल तक सभी पत्रकारों को गौर से देखा और उन्हें महसूस किया। उनके हुलिये से लेकर उनकी वर्किंग स्टाइल तक को जितना जरूरी था मैंने एडॉप्ट किया। इसके लिए निर्देशक राज एंड डीके ने भी मेरी बहुत सहायता की।

 जर्नलिस्ट नम्रता और मधुरिमा में क्या समानता और फर्क है?
समानता ये है कि नम्रता और मैं दोनों स्ट्रॉन्ग होने के साथ प्रतिभाशाली और केयरिंग हैं और फर्क ये है कि सच्चाई जानने के लिए नम्रता दायरे को क्रॉस कर देती है, जबकि मधुरिमा नहीं।

 क्या आप अपने करियर से संतुष्ट हैं?
मैं अपने करियर से खुश नहीं लेकिन संतुष्ट हूं। फिल्म ‘बेबी’ के बाद मैं ज्यादा फिल्मों में नजर नहीं आई क्योंकि मुझे बढ़िया स्क्रिप्ट नहीं मिली और मैं उटपटांग रोल नहीं करना चाहती थी। सभी जानते हैं कि मेरा कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है। बिना किसी फिल्मी सपोर्ट और मेंटॉर के यहां टिकना बहुत मुश्किल है। मुझे जो भी काम मिला उससे मैं संतुष्ट जरूर हूं लेकिन खुश नहीं क्योंकि मैं इससे भी बेहतर डिजर्व करती हूं।

 नेपोटिज्म के बारे में आपका क्या कहना है?
नेपोटिज्म हर क्षेत्र में है और ये सदियों से चला आ रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म के होते हुए भी आउट साइडर्स को काम मिल रहा है। ‘अवरोध’ को ही देख लीजिए अमित साध, दर्शन कुमार और मैं आउट साइडर ही हैं। हां, इसमें दो राय नहीं कि आउट साइडर्स को ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ता है। बैठे-बैठे कुछ भी हासिल नहीं होता। मैं इस बात को समझ चुकी हूं। मेहनत ही सही, मैं करती रहूंगी।