मेरा बेटा लावारिस नहीं, बेबस मां की पुलिस से गुहार

अनुकंपा पर मिली थी नौकरी
परिचय पत्र के बावजूद लावारिस

मीरा रोड रेलवे पुलिस की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मशार कर दिया है। रेलवे की सेवा में ही कार्य करनेवाले बेटे की रेल एक्सीडेंट में मौत के बाद मां को उनका बेटा लावारिस नहीं है कि गुहार लगानी पड़ी।
शनिवार ९ फरवरी को ३ बजे मीरारोड से दहिसर के बीच चर्चगेट की तरफ जानेवाली ट्रेन से गिरकर चेतन मुरलीधर मोटवानी (३३) की मौत हो गई। चेतन वर्ष २०१० से भाइंदर में रेल खलासी के रूप में कार्य करता था और वसई के रेलवे क्वॉर्टर में रहता था। चेतन के पिता मुरलीधर भी रेल कर्मचारी थे। उनकी मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर चेतन को रेलवे में नौकरी मिली थी।


मीरा रोड रेलवे पुलिस ने चेतन के मौत की खबर फोन के माध्यम से परिजनों को दी। खबर मिलते ही चेतन की मां शाम ५ बजे मीरारोड स्टेशन पहुंच गई। रात को करीब ८ बजे तक चेतन का शव मीरा रोड स्टेशन पर ही उसकी मां के सामने रखा रहा। बाद में पुलिस ने चेतन की मां को भाइंदर-पश्चिम के भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी (टेंबा) अस्पताल से रविवार की सुबह शव ले जाने के लिए कहा।


रविवार की सुबह चेतन की मां जब टेंबा अस्पताल पंहुची तो उसे पता चला कि उनके बेटे के शव को मीरारोड रेलवे पुलिस ने लावारिस शव दर्ज कर टेंबा अस्पताल में जमा कराया था। इस वजह से चेतन का पोस्टमार्टम नहीं किया गया था जबकि ट्रेन हादसे में मौत के समय चेतन की जेब में रेल कर्मचारी होने का परिचय पत्र भी मिला था। बाद में चेतन की मां ने चेतन का आधार कार्ड, पेन कार्ड घर से लाकर मीरा रोड रेल पुलिस और अस्पताल के कर्मचारियों को दिखाया और रो-रोकर गुहार लगाई कि उनका बेटा लावारिस नहीं है। २४ घंटे की मशक्कत के बाद चेतन का शव रविवार को तीन बजे दिन में उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। इस घटना की चौतरफा निंदा हो रही है। जब इस मुद्दे पर जीआरपी से बात की गई तो कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हुआ। मामला दर्ज करनेवाले वीवी सुतार ने कहा है कि गलती हो गई है अब आगे से ऐसी गलती नहीं होगी।