मेरा शरीर ही मेरा इंस्ट्रूमेंट है!

अपनी बोल्डनेस से सुर्खियां बटोरनेवाली राधिका आपटे इस समय फिल्म `अंधाधुन’ और `बाजार’ को लेकर चर्चा में हैं। `अंधाधुन’ में राधिका के अपोजिट हैं आयुष्मान खुराना और निर्देशक हैं श्रीराम राघवन तो `बाजार’ के निर्देशक हैं गौरव चावला और सैफ अली खान हैं राधिका के अपोजिट हैं। अपने करियर के बारे में राधिका आपटे ने पूजा सामंत से बातें शेयर की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-
 २ फिल्में एक साथ रिलीज हो रही हैं, इससे आपके करियर को नुकसान होगा?
यह सिर्फ और सिर्फ संजोग की बात है कि मेरी २ फिल्में एक साथ रिलीज हो रही हैं। शायद मेरे स्थान पर कोई भी दूसरा कलाकार होता तो वो एक फिल्म की रिलीज आगे कर देता। `बाजार’ को `अंधाधुन’ से पहले रिलीज होना था। `अंधाधुंन’ १ वर्ष में बनकर रिलीज भी हो रही है।
आयुष्मान खुराना, श्रीराम राघवन  के साथ आपने `अंधाधुंन’ फिल्म की। किस तरह से अलग है यह फिल्म?
मैंने श्रीराम राघवन के साथ २०१५ में फिल्म `बदलापुर’ की थी। `अंधाधुन’ श्रीराम के साथ दूसरी फिल्म है। यह फिल्म सस्पेंस, थ्रिलर है जिसके बारे में मैं ज्यादा नहीं बता सकती अन्यथा थ्रिल खत्म हो जाएगा। `अंधाधुन’ में तब्बू के साथ काम करना मेरे लिए यादगार रहा। जब वो शॉट देती थीं तो मैं उन्हें ही आश्चार्यचकित होकर देखती रहती थी। अफसोस कि तब्बू के साथ मेरा सिर्फ एक ही सीन है `अंधाधुन’ में।
 क्या है किरदार आपका?
जैसा मैंने कहा कि यह फिल्म थ्रिलर है। मैं इस फिल्म की कहानी, किरदार कुछ भी बताने में असमर्थ हूं। श्रीराम राघवन डार्क फिल्म्स बनाने में माहिर हैं। यह फिल्म ही कुछ ऐसी है लेकिन मैंने इस फिल्म में एक खुश-मिजाज युवती का रोल निभाया है, इतना ही कह सकती हूं।
 सुना है `अंधाधुन’ की शूटिंग पुणे में हुई। अपने शहर में शूटिंग करना कैसा लगा?
मैं पुणे में ही जन्मी हूं। मेरा एजुकेशन भी वहीं हुआ और श्रीराम राघवन भी पुणे से हैं। उनका प्रयास रहता है कि शूटिंग की लोकेशन पुणे हो। इस बार जब पुणे के प्रभात रोड और कैंप एरिया में शूटिंग हुई तो हम दोनों को अपना पास्ट याद आया। पुणे में शूटिंग करना, ब्रेकफास्ट करना बहुत प्यारा लगता था।  बेहद सुकूनभरे थे वो पल, जब हमने पुणे में शूटिंग की।   `बाजार’ में आप नेगेटिव रोल करने के लिए कैसे तैयार हो गर्इं ?’
यह कोई नेगेटिव रोल नहीं है। `बाजार’ में मेरा किरदार महत्वाकांक्षी है। यह सैफ अली की दोस्त है, उसकी सेक्रेटरी भी है। किसी महिला का महत्वाकांक्षी होना कोई गलत बात तो नहीं है बल्कि मैं मानती हूं कि यह मेरा किरदार बहुत चैलेंजिंग है।
 आपने कुछेक बोल्ड किरदार निभाएं हैं। उस पर आपका क्या कहना है?
अभिनय काया, वाचा, मन (शरीर, मुख और मन) से किया जाता है, यह मैंने थिएटर के दिनों से सीखा है। मेरा शरीर ही मेरा इंस्ट्रमेंट है और अगर कहानी और किरदार को बोल्ड लुक चाहिए तो मुझे कोई आपत्ति नहीं थी और न ही है। किरदारों को अंग प्रदर्शन के नजरिए से नहीं, किरदार समझना होगा।