मेरिट की मारामारी, एडमिशन तो मिलेगा लेकिन नामचीन कॉलेज में नहीं

१०वीं में सफल हुए छात्रों की असल जंग तो अब शुरू होनेवाली है। छात्रों के लिए ११वीं में एडमिशन की राह आसान नहीं होगी। कॉलेजों के प्रिंसिपल की मानें तो इस बार मेरिट लिस्ट में नाम आने के लिए छात्रों के बीच अंकों की मारामारी देखने को मिलेगी। नामचीन कॉलेजों में एडमिशन के लिए होनेवाले दंगल में राज्य बोर्ड के छात्रों पर सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के छात्र भारी पड़ेंगे।
मुंबई में इस वर्ष ९० प्रतिशत से अधिक अंक पानेवाले छात्रों की संख्या ५,३९९ है। जबकि पिछले साल १३,००० से अधिक छात्रों को ९० प्रतिशत से ज्यादा अंक मिले थे। दूसरी ओर सीबीएसई और आईसीएसई के करीब ५७,००० विद्यार्थियों को ९० प्रतिशत से अधिक अंक मिले हैं। परीक्षा में उच्च अंक पाने का फायदा कनिष्ठ महाविद्यालय में प्रवेश के दौरान सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों को मिलेगा।
९० और ९५ अंक मिलने की वजह से ११वीं की पहली मेरिट लिस्ट में मुंबई व आसपास के क्षेत्र में नामचीन कॉलेजों में सीबीएसई और आईसीएसई के छात्रों का दबदबा रहेगा। इस साल राज्य बोर्ड के रिजल्ट में भी १३ प्रतिशत की गिरावट हुई है, एसएससी में मुंबई मंडल से ७७.०४ प्रतिशत छात्रों को सफलता मिली हैं, जबकि वर्ष २०१८ में मुंबई मंडल का रिजल्ट ९०.४१ प्रतिशत रहा था। सीबीएसई के चेन्नई रीजन के अंतर्गत आनेवाले मुंबई का परीक्षा परिणाम ९९ प्रतिशत रहा है। मुंबई समेत राज्य में आईसीएसई में छात्राओं का पासिंग परसेंट ९९.०५ फीसदी है। उक्त आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि राज्य बोर्ड के छात्रों के लिए राह आसान नहीं होगी। विल्सन कॉलेज के निदेशक डॉ. टी.पी. शिवारे ने कहा इस बार राज्य के बच्चों का परिणाम काफी कम है। ओरल परीक्षा छात्रों के विकास के लिए जरूरी है लेकिन इस बार उसे हटा दिया गया। अब अन्य बोर्ड के बच्चों का परिणाम राज्य बोर्ड के बच्चों से काफी अच्छा है। ऐसे में नामचीन कॉलेजों में ज्यादातर सीटों पर अन्य बोर्ड के टॉपर्स का ही वर्चस्व रहेगा। कीर्ति कॉलेज की प्रिंसिपल प्रतिभा सोनावणे ने कहा कि ९० और ९५ प्रतिशत अंक पानेवाले सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है। वहीं मुंबई सहित राज्य में टॉपर्स की संख्या काफी कम है। निश्चित है कि जिसके जितने अच्छे अंक होंगे, उसे ही मेरिट में जगह मिलेगी।