मेरी स्टाइल अलग है -अक्षय खन्ना

थोड़ी करो पर दमदार करो, इसी लाइन पर चलनेवाले अभिनेता हैं अक्षय खन्ना। इनके फिल्मी करियर को बीस साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन कुछ खास किरदारों को लेकर  निर्देशकों की पसंद अक्षय खन्ना ही हैं। इन दिनों वे फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइमिनिस्टर’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में वे मनमोहन सिंह के खास और पत्रकार संजय बारू के किरदार में हैं। इस फिल्म को लेकर उठे विवाद पर क्या सोचते हैं अक्षय खन्ना, इसे जानने के लिए पूजा सामंत ने अक्षय खन्ना से बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश…

आपकी फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइमिनिस्टर’ रिलीज होने से पहले ही विवादों में है, ऐसा क्या है इस फिल्म में जिससे ये हंगामा मच गया है?

कोई हंगामा नहीं है, कोई रिविलेशंस नहीं है, कोई भंडाफोड़ नहीं है इस फिल्म में। इस फिल्म के लेखक भले ही मयंक तिवारी हैं लेकिन २०१४ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सहयोगी और पत्रकार संजय बारू ने ‘द एक्सीडेंटल प्राइमिनिस्टर’ नाम से किताब लिखी थी। जिसमें मनमोहन सिंह के साथ अपने कामकाज और जिंदगी के अलावा मनमोहन सिंह के जीवन का उल्लेख है। इसी पर यह फिल्म आधारित है। इस किताब को हजारों लोगों ने पढ़ा होगा लेकिन तब कोई हंगामा नहीं हुआ तो अब क्यों कोहराम मच रहा है।

 इस फिल्म को साइन करने की वजह?

मनमोहन सिंह और पत्रकार संजय बारू के बीच बेहद गहरा रिश्ता था। मनमोहन सिंह अपनी हर बात संजय बारू से शेयर करते थे। ऐसे में संजय बारु का किरदार मनमोहन सिंह जितना ही सशक्त और प्रॉमिनेंट है। मैंने इस फिल्म में संजय बारू की भूमिका निभाई है। यही वजह रही इस फिल्म को साइन करने की।

 संजय बारू का किरदार निभाने के लिए आपको कितना होमवर्क करना पड़ा?

होमवर्क? नहीं! मैंने कोई होमवर्क नहीं किया। संजय बारू से अब तक मिला भी नहीं हूं। मैंने इस फिल्म में जर्नलिस्ट संजय बारू का किरदार निर्देशक विजय गुट्टे के नजरिए से निभाया है। इस किरदार को उन्होंने पहले अपने चश्मे में उतारा और वह चश्मा मुझे दिया। हो सकता है निकट भविष्य में संजय बारू से मिलूं।

 आपके फिल्मी सफर २० साल हो चुके हैं, नई पीढ़ी की तुलना में खुद को कहां पाते हैं आप?

मैं खुद की तुलना नई जनरेशन से बिल्कुल नहीं करता। मेरा वक्त अलग था। डैड द्वारा लॉन्च किए जाने के बाद मैंने अपने निजी जीवन और करियर को समान वक्त दिया। आज के दौर के हर एक्टर बहुत प्रीपेयर्ड होकर आते हैं लेकिन मेरे काम करने का स्टाइल अलग है।

 राहुल खन्ना और आप क्या किसी फिल्म में साथ आएंगे?

क्यों नहीं? लेकिन हम दोनों के लिए सशक्त रोल हो। हम दो भाई महज साथ में काम करने के लिए कैसे एक फिल्म कर सकते हैं? किसी को हम दोनों के लिए स्ट्रांग कॉन्टेंट वाली फिल्म लिखनी होगी। तभी यह मुमकिन हो पाएगा।

 क्या अक्षय खन्ना को हम निर्माता-निर्देशक के रूप में देख सकते हैं?

नहीं! मैं निर्देशक नहीं बन सकता क्योंकि एक निर्देशक को सभी को एक साथ लेकर चलना पड़ता है और यह काम मैं नहीं कर सकता। मुझे बहुत जल्दी गुस्सा आता है। मैं किसी को नहीं बर्दाश्त कर सकता। मेरे लिए एक्टिंग ही बहुत है। अपना काम करो और चलते बनो।