मेरे हिसाब से डेंजरस है!

 

ट्विंकल खन्ना, राजेश खन्ना एवं डिंपल कपाड़िया की सुपुत्री हैं और बहुत ही स्पष्टवादी हैं। ट्विंकल ने शादी के पहले कुछ फिल्मों में काम किया है किंतु वे नहीं चाहती कि उनकी कोई भी फिल्मों का रीमेक हो। ट्विंकल खन्ना दोबारा अपनी किताब `पयजामास आर फॉरगिविंग’ को लेकर चर्चा में हैं। ट्विंकल खन्ना से लिपिका वर्मा ने विभिन्न मुद्दों पर बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

‘पयजामास आर फॉरगिविंग’ एक बोल्ड और ब्रेव ढंग से लिखी गई किताब है। आपका क्या मत है?

`पयजामास आर फॉरगिविंग’ मेरे हिसाब से एक ऐसी बुक है, जिसमें महिलाओं को एक स्थान दिलवाने की कोशिश है। इस कहानी का परिवेश बहुत ही रोचक है। यह पर्सनली मेरे लिए भी बहुत ही रोचक है।

आपकी किताब जानी मानी हस्तियों को टारगेट करती है। क्या उन्हें बुरा नहीं लगेगा?

जी, मेरी किताब में मैंने ऐसी कोई बात नहीं लिखी है, जिससे किसी को एतराज हो। मेरे हिसाब से यह किताब एक अच्छे ह्युमौर में लिखी है। आशा करती हूं इसे पढ़कर सभी लुत्फ उठाएंगे।

किताब के शीर्षक `पयजामास आर फॉरगिविंग’ का क्या तात्पर्य है?

हमारी इस दुनिया में हम टाइट जीन्स पहनते हैं और अपने ही शरीर को तकलीफ देते हैं। क्या हम ढीले पयजामास पहनकर अपने शरीर को आराम नहीं दे सकते हैं? किताब की नायिका बहुत ही दयालु भाव रखती है इस वजह को लेकर और तो और वह अपने टाइट पयजामास फेंक देती है इसीलिए `पयजामास आर फॉरगिविंग’ शीर्षक रखा है मैंने।

आपके निजी जीवन में रिडेम्पशन का क्या मायने है ?

मेरे लिए रिडेम्पशन का मायने बहुत ही सरल है। मैंने अपने जीवन में सबकुछ पा लिया है। क्या यह मेरे लिए बहुत है? नहीं! मेरे लिए यह बहुत अनिवार्य है कि मैं उन सारी महिलाओं को उनके जीवन में रिडेम्पशन दिलवाने में मदद करूं जो कई चीजों से वंचित हैं।

आज के पपराजी के बारे में आपके क्या विचार है?

देखिए, हमारे जमाने में हमें ऐसी कोई दिक्कत कभी नहीं आई। हम अपने पडोसी दोस्तों के घर आराम से चले जाया करते यदि हमारे बच्चों की तस्वीरें अखबारों में छप जाएं तो उन्हें एक पहचान मिल जाती है। सो, वे खुलेआम घूमने में असमर्थ रहते हैं। यह मेरे हिसाब से डेंजरस है।

`कॉफी विथ कारन’ शो वापस शुरू होने को है। क्या आप दोबारा इस शो में नजर आएंगी?

मैं `कॉफी विथ करन’  एक बार ही जा चुकी हूं। शायद दोबारा अब न जाऊं, बहुत हो गया।