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मैंने इंतजार करना ठीक समझा!

छोटे पर्दे पर तकरीबन ६ वर्षों तक राज कर चुकीं अभिनेत्री अंकिता लोखंडे की पहचान ‘बालाजी प्रोडक्शंस’ के बेहद लोकप्रिय डेली शो ‘पवित्र रिश्ता’ के कारण दर्शकों में अच्छी-खासी बन गई। अर्चना और अंकिता इन दो किरदारों से अंकिता ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई। फिल्म ‘मणिकर्णिका’ में ‘झलकारी बाई’ का किरदार निभाकर उन्होंने वाहवाही बटोरी। अंकिता की अगली फिल्म ‘बागी-३’ ६ मार्च को रिलीज हो रही है। पेश है अंकिता लोखंडे से हुई पूजा सामंत की बातचीत के प्रमुख अंश-

 धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ के लंबे गैप के बाद आप फिल्म ‘मणिकर्णिका’ में नजर आर्इं। अब दो वर्षों के गैप के बाद ‘बागी-३’ कर रही हैं?
आपने कई सवालों को एक ही सवाल में पूछ लिया। सबसे पहले तो मैं ये बता दूं कि साजिद नाडियादवाला की प्रâेंचाइजी फिल्म ‘बागी-३’ का ऑफर मेरे मुंहबोले भाई मुकेश छाबरा ने दिया। ऑफर्स तो मुझे बहुत मिले लेकिन रोल खास न लगने की वजह से मैंने कोई फिल्म साइन नहीं की। लेकिन ‘बागी-३’ का किरदार अच्छा लगने पर मैंने इस फिल्म को साइन कर लिया।

 श्रद्धा कपूर, रितेश देशमुख से किस तरह की बॉन्डिंग रही आपकी?
जब एक सेट पर मराठी कलाकार हों तो उनकी जुबान पर मराठी आएगी ही, जो स्वाभाविक है। रितेश बहुत फनी मराठी में मुझसे बातें करते हैं, श्रद्धा और मैं पूरे दिन हाजमोला वैंâडी और कच्ची वैâरी खाते रहते हैं। हम तीनों के कारण टाइगर भी मराठी में एकाध वाक्य बोल देते थे। बहुत मजेदार समय बिताया हम चारों ने।
 क्या कम फिल्में करना आपकी स्ट्रेटेजी है?
ये किस्मत की बात है और कुछ नहीं। मैं खुद स्टेट लेवल बैडमिंटन प्लेयर होकर अभिनय का सपना लेकर इंदौर से मुंबई आई। मेरे पास न तो एक्टिंग की डिग्री थी और न कोई गॉडफादर। रियलिटी शोज में हिस्सा लेने के बाद ‘कॉमेडी सर्कस’, ‘झलक दिखला जा’ और ‘पवित्र रिश्ता’ जैसा शो मिला, जिसने मुझे बहुत लोकप्रियता दी। फिल्म में डेब्यू करने के लिए मैंने लंबा इंतजार किया। ‘मणिकर्णिका’ के बाद लोगों की उम्मीदें मुझसे बढ़ गर्इं। जो भी रोल मिले, उसे स्वीकारने की बजाय मैंने इंतजार करना ठीक समझा।

 फिल्म ‘पद्मावत’ को न करने का अफसोस तो होता होगा?
‘पवित्र रिश्ता’ के दौरान ब्रेकअप हो जाने से मैं डिप्रेशन में चली गई और ‘पद्मावत’ नहीं कर सकी। लेकिन अब उन बातों को दोहराने का कोई मतलब नहीं है। मैं अपने जीवन में आगे बढ़ चुकी हूं और अब मैं अच्छे प्रोजेक्ट्स करना चाहती हूं।

 ‘मणिकर्णिका’ के लिए आपको ‘फिल्मफेयर’ में नॉमिनेशन तक नहीं मिला?
पुरस्कार मिलना या न मिलना किस्मत और गेम जैसे हैं। कोई मलाल नहीं है मुझे पुरस्कार न मिलने पर।

 क्या आप छोटे पर्दे को मिस करती हैं?
बिल्कुल नहीं! मैंने अपने जीवन के १० वर्ष छोटे पर्दे को दिए हैं। मैं खुद को छोटे पर्दे की क्वीन मानती हूं। अब मैंने बड़े पर्दे पर अच्छे और यादगार रोल करने के सपने संजोए हैं। अब टीवी नहीं करना है। टीवी बहुत डिमांडिंग है। १२-१४ घंटे लगातार काम करना पड़ता है डेली सोप्स में। अब मैं अपने मन मुताबिक फिल्म्स और किरदार करना चाहती हूं। फिल्मों का नशा ही कुछ और है और इस समय मैं फिल्मों का नशा पाना चाहती हूं।

 क्या आप वेबसीरीज करना चाहेंगी?
बिल्कुल नहीं।

 इंदौर से मुंबई तक के सफर से कितनी संतुष्ट हैं आप?
मैंने अपने अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना सीखा है। मेरी मां, नानी और मौसी ने मुझे दोबारा खड़ा किया। ये कड़ा संघर्ष मैंने अपने जीवन की सबसे स्ट्रॉन्ग महिलाओं की वजह से किया। मैं सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि आम और खास हम सभी महिलाओं में एक कुदरती सशक्तता भगवान ने दी है, उसे पहचानिए। अपने जीवन की बागडोर अन्य लोगों के हाथ में मत दीजिए।

– अंकिता लोखंडे

जन्म तारीख – १९ दिसंबर, जन्म स्थान – इंदौर
कद – ५ फुट ४ इंच, वजन – ५२
प्रिय रंग – पीकॉक ब्लू, ऑलिव ग्रीन
मनपसंद व्यंजन – बटाटा पोहा
पसंदीदा डेजर्ट – आम्रखंड, प्रिय परिधान – साड़ी
मनपसंद फिल्म – ‘गॉन विथ द विंड’
पसंदीदा कलाकार – तृप्ति तोरडमल
हॉबी – पढ़ना, गार्डनिंग, प्रिय टुरिस्ट प्लेस – इंदौर