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मैंने टीवी से दूरियां बना ली हैं! इकबाल खान

छोटे पर्दे के सबसे सफल और हैंडसम हंक्स में अभिनेता इकबाल खान का शुमार है। इनकी खूबी ये है कि एक एक्टर की आवाज जैसी बुलंद होनी चाहिए वैसी बुलंद आवाज है इनकी। रोबिले व्यक्तित्व के धनी इकबाल खान ने टीवी के लिए दर्जनों शोज नहीं किए लेकिन जितने भी शोज किए उनमें अपनी असीम छाप जरूर छोड़ी। इस समय इकबाल वेब शो कर रहे हैं, जिसके निर्देशक अपूर्व लाखिया हैं। पेश है इकबाल से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
सफल होने के बावजूद कम शो करने की वजह?
आज से कुछ वर्ष पहले कई अच्छे शो बन रहे थे। मैंने जिन शोज में काम किया वे सराहे गए। लेकिन फिर ऐसा भी वक्त आया जब शोज की कहानी मुझे पसंद नहीं आई। जिन शोज में आपकी दिलचस्पी न हो उसे करने का क्या फायदा?
आप शायद इसलिए ऐसा कह रहे हैं क्योंकि छोटा पर्दा नायिका प्रधान कहानियों का हो चुका है?
नायिका प्रधान कहानियों का दौर आज से २० साल पहले भी था। मुझे इस बात का अफसोस न तो पहले था और न अब है। मेजॉरिटी टीवी शोज महिलाओं के लिए बने होते हैं। मेरा आक्षेप है कहानियों के गिरते स्तर पर। जो कहानी अच्छी लिखी जाती है, उस कहानी में शूटिंग के बाद रिसर्च डिपार्टमेंट कुछ बदलाव कर देता है। कहानियों में हेरफेर शो का ढांचा ही बदल देता है। अल्टीमेटली टीआरपी पर असर पड़ता है और टीआरपी न मिलने से शो बंद हो जाता है। फिर शो के बंद होने का खामियाजा अक्सर इस शो के कलाकारों पर फोड़ा जाता है। ये सब देखकर निराशा होती है। अब टीवी में ज्यादा अच्छा काम नहीं है। यही वजह है जो मैंने टीवी से थोड़ी दूरियां बना ली हैं।
वेब शो ‘क्रैक डाउन’ करने की वजह?
वेब शोज अर्थात ओटीटी प्लेटफार्म पर विषयों और कहानियों की कोई कमी नहीं है। कहानियां ७-८ एपिसोड्स में खत्म हो जाती हैं। ‘क्रैक डाउन’ को अपूर्व लाखिया ने निर्देशित किया है। इस शो में मैं रॉ एजेंट बना हूं।
इस रोल के लिए कोई खास तैयारी की आपने?
वेब शो में होमवर्क करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिलता। आप मेरे बालों में जो सफेदी देख रही हैं ये शो के लिए जरूरी था। एक्शन सीक्वेंसेस करने के लिए जो किया सब सेट पर शूटिंग से पहले रिहर्सल्स के दौरान ही किया।
आप गाली-गलौज, वल्गेरिटी, इंटीमेट सीन के लिए कितना तैयार थे?
वेब शो में भद्दी भाषा या इंटीमेट सीन रखना कितना जरूरी है इसका ध्यान लेखक को रखना पड़ता है इसमें कलाकार क्या कर सकते हैं? एक बार किसी शो के लिए आपने हामी भर दी तो कलाकार को सरेंडर होना ही पड़ता है।
आप सोशल मीडिया पर बहुत अच्छा लिखते हैं। क्या कभी लेखक बनने का भी खयाल आया?
पोस्ट और शो लिखने में जमीन-आसमान का फर्क है। कहानी में कई तरह के बदलाव होते हैं। कोई कहता है ये किरदार हटा दो, कोई कहता है ट्रैक बदलो। ऐसा करते-करते कहानी के चीथड़े उड़ जाते हैं और जब शो नहीं चलता तो चैनल और मेकर्स सभी पैनिक हो जाते हैं। ये सब मैं देख चुका हूं। जिस शो की टीआरपी अच्छी वो शो अच्छा और उसका कलाकार कामयाब। बड़ा ही चिंताजनक मामला है।
बेबाकी से अपनी बात रखने पर क्या आपको डर नहीं लगता?
जहां मेरी राय पूछी जाती है मैं बोलता हूं। आपने सवाल पूछा मैंने अपनी बात कही। मेरा मानना है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट न डालें जिससे आम जनता में अफरातफरी मचे। समाज को गुमराह करनेवाली बात नहीं होनी चाहिए।
क्या आप फिल्मों में काम करना चाहते हैं?
अच्छी सेंसिबल फिल्म कौन नहीं करना चाहेगा? लेकिन फिल्मों का मामला कुछ और है। गिनती के चार-पांच नामी प्रोडक्शन हाउस हैं उनकी फिल्मों में ज्यादातर वही स्टार्स होते हैं। अगर आप कास्ट हुए तो रोल और कहानी दमदार होनी चाहिए। मैंने फिल्में की हैं लेकिन बहुत कम।
जन्मतिथि – १० फरवरी,  जन्मस्थान – श्रीनगर
कद – ६ फुट,  वजन – ७७ किलो
मनपसंद व्यंजन – रोगनजोश, मटन बिरयानी
प्रिय डेजर्ट – अंगूर बासुंदी,  प्रिय टूरिस्ट प्लेस – श्रीनगर
पसंदीदा कलाकार – अमिताभ बच्चन, ओम पुरी
प्रिय परिधान – कंफर्टेबल कपड़े