‘मैं मना नहीं करता!’-जॉन इब्राहिम

कॉलेज स्टूडेंट से मॉडल बने और मॉडल से अभिनेता, अभिनेता से स्टार और स्टार से निर्माता बने जॉन इब्राहिम के करियर का ग्राफ काबिलेतारीफ रहा है। उनकी फिल्म ‘बाटला हाउस’ को ‘मिशन मंगल’ जैसी मल्टी स्टारर फिल्म से तगड़ी कॉम्पिटिशन मिलने के बाद भी ‘बाटला हाउस’ को सफलता मिली। ‘बाटला हाउस’ के बाद कॉमेडी फिल्म ‘पागलपंती’ में जॉन नजर आएंगे। अनीस बज्मी निर्देशित इस मल्टी स्टारर फिल्म में जॉन के साथ अनिल कपूर, अरशद वारसी, पुलकित सम्राट, इलियाना डिक्रूज, कृति खरबंदा और उर्वशी रौतेला भी हैं। जॉन ने यहां करियर के साथ ही अपने उसूलों के बारे में भी बातचीत की है पूजा सामंत से-
किस तरह की पागलपंती की है आपने इस फिल्म में?
इस फिल्म में मेरे किरदार पर साढ़ेसाती का साया है और इसके चलते मैं सभी से मदद मांगता हूं। इसी कारण एक नहीं कई सारी कॉमेडी घटनाएं घटती हैं। अनीस बज्मी जितने कमाल के राइटर हैं उतने ही कमाल के निर्देशक भी हैं। हालांकि मैंने सीरियस फिल्में ज्यादा की हैं, पर कॉमेडी फिल्म करना खुद को डी-स्ट्रेस करने जैसा ही होता है।
असली जिंदगी में आप क्या साढ़ेसाती को मानते हैं?
हां, बिल्कुल मानता हूं। हम अक्सर अनुभव करते हैं कि हमारा कोई काम ढंग से नहीं होता। अगर मैं एक्टर हूं तो फिल्में असफल होती हैं।
आपने अमूमन सोलो हीरो फिल्में की हैं, फिर ये मल्टीस्टारर फिल्म करने के पीछे कोई खास वजह?
मैं सोलो हीरोवाली फिल्में ज्यादा करता हूं, पर जब मल्टीस्टारर फिल्म करता हूं तब मैं फिल्म का कंटेंट और निर्देशक देखता हूं। ‘पागलपंती’ करने के पीछे अनीस बज्मी के अलावा मुख्य वजह अनिल कपूर भी थे। अनिल जी बेहतरीन एक्टर और बहुत उम्दा को-एक्टर हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उनके साथ मेरा एक खास इक्वेशन है।
आपके व्यक्तिगत जीवन में कब पागलपंती हुई थी?
इस तरह के मजेदार किस्से होते रहते हैं। अब यही देखिए न, मेरी मम्मी पारसी हैं तो डैड केरलाइट। यानी मैं आधा पारसी और आधा मल्लू हूं। लोग कहते हैं कि पारसी लोग आधे पागल होते हैं। जब घर में एक अजीब से विचारोंवाला कोई है तो कुछ मजेदार वाकये होते रहते है।
पिछली फिल्म ‘बाटला हाउस’ की सफलता का श्रेय आप किसे देंगे?
फिल्म ‘बाटला हाउस’ की कहानी जब एक निर्माता को सुनाई तो उन्होंने इस फिल्म के प्रति दिलचस्पी नहीं दिखाई। मैं आश्वस्त था कि फिल्म में दम है। फिल्म का श्रेय फिल्म से जुड़े कलाकार, निर्देशक और तो और स्पॉट बॉय को भी जाता है। यह एक टीम वर्क है।
आपके लिए अवाॅर्डस के क्या मायने हैं?
मुझे अवाडर््स की फिक्र नहीं है। लेकिन मैंने अपने मेकर्स, वैâमरामैन और स्टाफ से कहा है कि अगर आप नॉमिनेट होते हैं और आपको पुरस्कार मिलता है आप जरूर पुरस्कार लें। मैं उन्हें मना नहीं करता। मैं नहीं जाना चाहता क्योंकि अवार्ड्स नाइट पर आयोजक कहते हैं, आपको पुरस्कार मिलनेवाला है इसलिए आपको डांस करना होगा, जो मैं नहीं करना चाहता। मेरे उसूलों में डांस कर
अवॉर्ड पाना उचित नहीं है। मेरे लिए सिर्फ ‘राष्ट्रीय’ पुरस्कार मायने रखता है।
आज जमाना वेब सीरिज का है। क्या आप भी वेब सीरिज करना चाहेंगे?
वेब सीरिज के लिए मेरी कंपनी कंटेंट बना रही है और मैं वेब सीरिज का प्रोड्यूसर हूं। लेकिन ये मेरी व्यक्तिगत भावना है कि मैं सिल्वर स्क्रीन पर नजर आऊं। वेब सीरिज करने की इस समय मेरी कोई मंशा नहीं है।