मैं सिर्फ टैलेंट देखती हूं

एकता कपूर न केवल टेलीविजन `क्वीन’ मानी जाती हैं बल्कि उन्होंने फिल्मों में भी अपना एक मुकाम बना लिया है। एकता ने महिलाओं को समानता देने की भी ठानी है। वे महिला प्रधान किरदार चुनकर टेलीविजन शो पेश करती हैं, जिससे महिलाओं के लिए न केवल एक नया रास्ता खुल गया है अपितु महिलाएं पुरुषों के ठीक सामने आकर खड़ी हो गर्इं हैं। पेश है एकता कपूर के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के प्रमुख अंश-
 आप अपनी टीवी जर्नी को कैसे देखती हैं?
देखिए, जहां तक मेरी ग्रोथ या फिर मेरी जर्नी कह लें २००८ में मेरे ५० से भी ज्यादा शो थे, जिनमें मेरा एक भी शो टॉप पर नहीं पहुंचा। मैंने २००९ में वापस कुछ अलग तरह से सोच कर अपने टेलीविजन शोज को पेश किया। मैंने अप्स देखे हैं किंतु अप्स से ज्यादा डाउंस चखे हैं। सो मैं साधारणत: एक बात बता दूं कि बतौर प्रोड्यूसर हमें अप्स या डाउंस से कुछ फायदा नहीं होता है। फायदा होता है तो केवल अच्छी कहानी पेश करने से।
 आपको टेलीविजन `क्वीन’ का खिताब दिया गया है। क्या कहना चाहेंगी इस बारे में?
जब आप कोई भी टैग दे देते हैं तो ये बहुत बड़े शब्द होते हैं। मेरे लिए एक बात बहुत महत्वपूर्ण है, यदि मैं यह सोचने लगूं कि `वाह’ मैंने बहुत अच्छा शो बनाया है तो बस उसके आगे मैं कुछ नहीं कर पाऊंगी। जब कभी भी नया शो या किसी फिल्म का लांच करती हूं तो सच कहूं तो मुझे बहुत डर लगता है पर हां, मैं पैशन और हार्र्ड वर्क करने में विश्वास करती हूं और इसी से मैं आगे बढ़ी हूं।
 कसौटी जिंदगी १७ साल बाद वापस ला रही हैं। क्या यह सीक्वल है?
जी नहीं! यह सीक्वल नहीं है अपितु रिबूट है और हर शो की अपनी जिंदगी होती है। अब इतने सालों बाद ऐसा शो आ रहा है तो नई पीढ़ी भी इसे देखेगी और जिस समय जिसका साइकिल पूरा होता है, वह उसी समय आना भी चाहिए और यदि कुछ अलग ढंग से पेश किया जाए तो लोगों को पसंद भी आता है।
 आप पहले से ही महिला सशक्तिकरण को दर्शाती रही हैं। क्या कहना चाहेंगी इस पर आप?
महिला हूं तो अपने आप को एम्पॉवर तो करना ही होता है। आपको बताऊं जब मैं बड़ी हो रही थी तभी मेरे पापा ने मुझसे कहा कि देखो अपना समय यहीं व्यर्थ न करना, या तो शादी करके सेटल हो जाओ या फिर जिंदगी में कुछ काम कर लो। बस, कुछ समय पश्चात मेरे पापा को एक टेलीविजन शो मिला। मैंने उसे प्रोड्यूस करने की जिम्मेदारी संभाली। फिर क्या था मैंने उस दिन से लेकर आज तक हार्ड वर्क के अलावा कुछ भी नहीं किया है।
 महिलाओं और पुरुषों की समानता के बारे में आप क्या मानती हैं?
मेरा ऐसा मानना है कि महिलाएं, पुरुषों से पीछे नहीं हैं। जब कभी मैं किसी को अपने यहां काम हेतु अप्वाइंट करती हूं तो मुझे उसकी उम्र, बायोडाटा इत्यादि से कुछ लेना-देना नहीं होता है। यदि मैं कुछ देखती हूं तो उसका टैंलेंट और उसमें काम करने की कितनी ज्यादा क्षमता है? फिर चाहे वह पुरुष हो या महिला, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।