" /> मोदी की नाट्यछटा अफवाहों से प्राण छटपटाया!

मोदी की नाट्यछटा अफवाहों से प्राण छटपटाया!

हमारे प्रधानमंत्री मोदी अभिनय में पारंगत हैं। इसलिए वे कब कौन-सी नाट्यछटा प्रस्तुत करेंगे ये तय नहीं होता। मोदी द्वारा लगातार दो दिनों तक अलग-अलग ट्वीट किए जाने से ऐसा नाटक तैयार हुआ है। हालांकि बाद में इस सस्पेंस का खुद मोदी ने ही खुलासा किया। सोमवार को मोदी ने अचानक घोषणा की, ‘सोच रहा हूं इस रविवार से सोशल मीडिया छोड़ दूं!’ सोशल मीडिया अर्थात समाज के इस माध्यम का त्याग करने की घोषणा के बाद मोदी भक्त हताश हो गए। हालांकि कुछ घंटों बाद मोदी के दूसरे ट्वीट के बाद ये पीड़ा कम हुई। ८ मार्च विश्व महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है इसलिए अपने सोशल मीडिया एकाउंट का एक दिन महिलाओं के लिए समर्पित करने की घोषणा करके मोदी ने अपने पहले ट्वीट की हवा निकाल दी और मोदी सोशल मीडिया से संन्यास नहीं लेंगे, ये साफ हो गया। लोग राजनीति से संन्यास लेते हैं, काम-धंधे से दूर होते हैं, परदे और रंगमंच से अभिनेता तीसरी घंटी के बाद एक्जिट लेते हैं लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोशल मीडिया से खुद को दूर करने की घोषणा करते ही कुछ समय के लिए खलबली मच गई। हालांकि इस गोता लगाते नाटक का ‘दूसरा भाग और दूसरा प्रवेश’ मंगलवार को सामने आया और नाटक का परदा गिर गया। सच कहें तो ‘सोशल मीडिया’ भारतीय जनता पार्टी का पंचप्राण है! २०१४ के लोकसभा रणसंग्राम को भाजपा ने सोशल मीडिया पर सायबर युद्ध करके जीता। उस समय गोबेल्स नीति का प्रयोग किया गया और कांग्रेस राजनीतिक पटल से अदृश्य हो गई। अमित शाह का एक बयान महत्वपूर्ण है, ‘जब हमारे सायबर योद्धा मैदान में उतरते हैं तब जीत केवल भाजपा की होती है।’ शाह का ये बयान ध्यान देने लायक है। लेकिन भाजपा की सायबर फौज के सेनापति नरेंद्र मोदी खुद मैदान छोड़कर जा रहे हैं, ऐसा संदेश प्रधानमंत्री द्वारा किए गए कल के ट्वीट से गया या ये जानबूझकर जाने दिया गया। इस पर जोरदार चर्चा होने के बावजूद इस पर सफाई न देते हुए इस मामले को चलने दिया गया। नाटक जब अपने पूरे शबाब पर आया तब नए क्लाइमेक्स को सामने लाकर चौंकानेवाले तरीके का बखूबी प्रयोग किया गया, अब ऐसा ही कहा जा सकता है। अपने संदेश को जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का कुशलता से उपयोग करने में मोदी को महारत हासिल है। ट्विटर पर मोदी के साढ़े ५ करोड़ लोगों से ज्यादा फॉलोवर हैं। मोदी का फेसबुक पेज ५ करोड़ लोगों तक पहुंचता है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब के माध्यम से मोदी रोज करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं। इन सबको छोड़ने का निर्णय मोदी वैâसे लेंगे? क्योंकि सोशल मीडिया का उपयोग नशा-पानी भले ही न हो लेकिन एक मस्त करनेवाली आदत है। इसकी आदत छूटनी कठिन है। मोदी के दोनों ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक चल रहा है। कहा जा रहा है, ‘मोदी एक बार प्रधानमंत्री पद भले छोड़ दें लेकिन सोशल मीडिया नहीं छोड़ेंगे।’ मजे की बात ये है कि इतने ‘पैâन फॉलोइंग’ को छोड़कर मोदी का सोशल मीडिया से संन्यास लेना कुछ ऐसा ही होगा मानो पूंजीपति अमेरिका ने कम्युनिस्टों का साम्यवाद स्वीकार कर लिया हो! सोशल मीडिया का उपयोग एक शौक है। महिलाओं को सजने-संवरने का शौक होता है। किसी को शृंगार का शौक होता है, किसी को अच्छा खाने-पीने में आनंद प्राप्त होता है। उनकी कोशिश यही रहती है कि हमेशा मेरी चर्चा होती रहे और वैâमरा मेरी ओर बना रहे। सोशल मीडिया पर इसीलिए वे सक्रिय रहते हैं। इसलिए सोशल मीडिया से दूर होने की बात के कुछ घंटों की अफवाह पर धूल फेंकते हुए मोदी ने उल्टे विश्व महिला दिवस पर देश के लोगों तक पहुंचने की बात कही। ८ मार्च को आपको प्रेरणा देनेवाली महिलाओं का वीडियो पोस्ट करने का आह्वान प्रधानमंत्री ने किया है। इसलिए सोशल मीडिया का त्याग करने की उनकी बात का भ्रम मिट चुका है। हालांकि एक बात सही है कि सोशल मीडिया समाज का मार्गदर्शक नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के सायबर योद्धाओं ने झारखंड गवां दिया। दिल्ली में बड़ी सायबर फौज उतारने के बावजूद भाजपा की हार हुई। ‘सीएए’ का विरोध करनेवालों को सोशल मीडिया पर देशद्रोही बताने के प्रचार के बावजूद लोगों को लुभा नहीं पाए। ये सोशल मीडिया से लोगों के घटते विश्वास का सूचक है। हालांकि मोदी के मन पर सोशल मीडिया का प्रभाव बना हुआ है। २०१४ में मोदी सायबर फौजों की रणभेरी के साथ मैदान में उतरे। इस फौज ने मनमोहन सिंह को ‘मौनी बाबा’ और राहुल गांधी को ‘पप्पू’ घोषित कर दिया। उनका मजाक उड़ाया। अब उसी सोशल मीडिया पर मोदी-शाह को उनकी ही भाषा में कड़ा ‘पलटवार’ मिल रहा है। सायबर फौजों का हथियार भाजपा पर उल्टा पड़ रहा है। क्या इस व्यथा के कारण प्रधानमंत्री श्री मोदी सोशल मीडिया का त्याग कर रहे हैं? मोदी के पहले ट्वीट के बाद ऐसा सवाल जरूर पैदा हुआ। हालांकि इसी हथियार पर मोदी ने नाट्य रूपी धार लगाई, ये उनके दूसरे ट्वीट से सामने आया। मोदी की यह नाट्यछटा कुछ घंटों तक देशभर में बिखरी। आखिरकार, सोशल मीडिया का मंच भाजपा का ऑक्सीजन है और ऑक्सीजन की नली मोदी फेंक दें ये असंभव है! वास्तव में सोशल मीडिया का सकारात्मक प्रयोग भी किया जाता है ये हाल ही में रतन टाटा जैसे लोगों ने साबित कर दिया है। एक सफाई कर्मचारी के बेटे की व्यथा टाटा सोशल मीडिया के माध्यम से सबके सामने लाए। सोशल मीडिया में ऐसे भी काम होते हैं। इसलिए सोशल मीडिया को छोड़नेवाली कुछ घंटों की अफवाह की बजाय मोदी को चाहिए कि वे टाटा का रास्ता अपनाएं। लेकिन यदि उन्होंने ऐसा किया तो उनके सायबर योद्धाओं का क्या होगा? फौज तो पेट पर ही चलती है और हम सोशल मीडिया नहीं छोड़ेंगे, ये बात मोदी ने खुद साफ कर दी है। इसलिए उन फौजियों का क्या होगा इसका भी उत्तर मिल चुका है। कुछ घंटों की अफवाह से फौजियों के प्राण जरूर छटपटाएं होंगे लेकिन फौज को अब नया काम मिल गया है। कुछ घंटों की अफवाह का यही मतलब है।