" /> मोदी देश के भाग्य ही!, ये गलतियां कैसे सुधारोगे?

मोदी देश के भाग्य ही!, ये गलतियां कैसे सुधारोगे?

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है। अगर कोरोना का संकट नहीं होता तो भारतीय जनता पार्टी अपने दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाती। हालांकि, सोशल मीडिया और मीडिया की मदद से यह वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई, ऐसा प्रकाशित खबरों से पता चलता है। मोदी सरकार करीब छह साल से सत्ता में है। पूर्ण बहुमत होने के कारण उनकी सरकार बिना किसी सहारे के चल रही है, लेकिन देश की कई चीजें बेसहारा हो गई हैं, ऐसा आरोप विरोधी दल लगा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ के मौके पर जो बयान दिए हैं, वे मजेदार हैं। मोदी सरकार के पिछले ६ सालों में पिछले ७० सालों की कमियों को दूर किया गया है, यह दावा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने किया है, जबकि गृहमंत्री अमित शाह का दृष्टिकोण थोड़ा अलग है। श्री शाह का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले छह दशकों की ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने का काम किया है। वहीं कोरोना संकट के समय मोदी भारत देश के प्रधानमंत्री हैं, यह हमारा सौभाग्य है। ऐसा बाण रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चलाया है। इन तीन प्रमुख नेताओं के भाषणों से पता चलता है कि मोदी का आत्मनिर्भर भारत कैसे रूप ले रहा है। कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे महान देश का इतिहास केवल छह-सात वर्षों का है। इसके पहले ये देश नहीं था। कोई स्वतंत्रता संग्राम नहीं था। तब का संघर्ष और बलिदान केवल भ्रम था। देश की सामाजिक, वैज्ञानिक, चिकित्सा, औद्योगिक क्रांति आदि सभी झूठ हैं। साठ सालों में कुछ भी नहीं हुआ। महाराष्ट्र का सह्याद्री पर्वत, हिमालय, कांचनजुंगा, गंगा-यमुना, कृष्णा-गोदावरी इन सभी का निर्माण गत छह सालों में ही हुआ है। महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ आंबेडकर, इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह आदि मौजूद ही नहीं थे। तो जो कहा जाता है कि जो काम उनके हाथों संपन्न हुए, वो सिर्फ बोलबचनगिरी के उदाहरण हैं। श्री नड्डा एक सज्जन व्यक्ति हैं, लेकिन उन्होंने जो कहा वह हास्यास्पद है। कोरोना वैश्विक संकट है। ऐसे में कि जब दूसरे देशों की स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा रही हैं, हिंदुस्थान में लॉकडाउन के दौरान कोरोना टेस्ट क्षमता १० हजार से बढ़कर १.६० लाख प्रति दिन हो गई है। आज देश में प्रतिदिन ४.५० लाख पीपीई किट का निर्माण किया जा रहा है। ५८ हजार वेंटिलेटर बनाए जा रहे हैं। क्या यह आत्मनिर्भरता की निशानी नहीं है? ऐसा सवाल डॉ. नड्डा पूछते हैं। हालांकि पोलियो जैसी बीमारियों को देश से पहले ही मिटा दिया गया था। किस सरकार ने टीबी और मलेरिया को नियंत्रण में लाया? कोरोना आज आया, इससे पहले प्लेग जैसी महामारी आई थी। डॉक्टर साहब, देश में पहले भी वेंटिलेटर्स थे और उन्हें चीन से नहीं मंगाया जाता था। पिछले ६० वर्षों में ‘कोरोना’ का कोई संकट नहीं था। इसलिए आज के जितने वेंटिलेटर्स की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन ६० वर्षों में ‘एम्स’ जैसा चिकित्सा संस्थान, लाखों डॉक्टर, सरकारी अस्पताल, आईसीएमआर जैसे संस्थान बनाए गए। जिन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन गोलियों को प्रे. ट्रंप ने दमदार आवाज में हिंदुस्थान से मंगवाया, कोरोना से लड़ने के लिए, उन गोलियों का उत्पादन इंदिरा गांधी के कार्यकाल में ही शुरू हुआ था और उसी आत्मनिर्भरता से ही देश में चिकित्सकीय क्रांति का बीजारोपण हुआ था, इसे कैसे भूला जा सकता है? माना कि मोदी ने ऐतिहासिक गलतियों को सुधारा। कश्मीर से अनुच्छेद ३७० हटाया। तीन तलाक की प्रथा बंद की। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर का निर्माण शुरू करने के पक्ष में फैसला सुनाया। यह सब पिछले छह वर्षों में हुआ और मोदी सरकार को इसके लिए श्रेय दिया ही जाना चाहिए लेकिन १९७१ में इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करके ‘विभाजन’ का बदला लिया, इसे ऐतिहासिक गलती माना जाए या ऐतिहासिक कार्य? इसे भी समझना होगा। राजीव गांधी ने डिजिटल क्रांति की शुरुआत की। नरसिंह राव और डॉ. मनमोहन सिंह ने गिरती हुई अर्थव्यवस्था को संभाला और उसे गति प्रदान की इसलिए आज का हिंदुस्थान खड़ा है। अगर यह गलती है तो इसे आप किस तरीके से ठीक करनेवाले हो? ७० सालों की जो कमियां ६ सालों में पूरी की गर्इं, उन ७० सालों में अटल बिहारी वाजपेयी के साढ़े पांच साल, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर के पास लगभग दो साल और जनता पार्टी के पास सवा दो साल हैं। यह कहना इतिहास से बेईमानी होगी कि यह समयावधि बरबाद हो गई और देश केवल पिछले छह वर्षों में ही खड़ा हो पाया। हालांकि वीर सावरकर का अपमान करने की गलती पिछले ६० वर्षों में जरूर हुई है, लेकिन इस गलती को सुधारने के लिए सावरकर को भारत रत्न देने का तरीका पिछले छह वर्षों में स्वीकार नहीं किया गया। छह सालों में जो कुछ हुआ, वो सब दुनिया के सामने है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था बिगाड़ दी। गरीबी बढ़ी। रोजगार समाप्त हो गए। आज हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार है। सार्वजनिक कंपनियों को खत्म कर और बेचकर आर्थिक सुधार का ढोल पीटा जा रहा है। एयर इंडिया जैसी राष्ट्रीय कंपनियां कभी भी जमीन पर गिर पड़ेंगी। कश्मीर में ३७० हटाने के बावजूद तनाव खत्म नहीं हो रहा। सिक्किम और लद्दाख की सीमा पर चीनी सेना हमारे सीने पर बंदूक ताने खड़ी है। चींटी जैसा देश नेपाल हमारी जमीन पर दावा ठोंक रहा है। यह सब आत्मनिर्भरता के मजबूत होने के संकेत नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी आज के सक्षम नेता हैं और कोई भी ऐसा नेता नहीं है जो उनके सामने टिक सके। उनमें राष्ट्र कार्य करने की ललक है। उन्होंने कई अच्छे फैसले लिए। बेशक, पिछले ६० सालों में गलतियां हुर्इं, उसी तरह पिछले छह वर्षों में भी हुर्इं। पिछले दो महीनों में गलत तरीके से किया गया लॉकडाउन और प्रवासी श्रमिकों के मामले विभाजन के समय के शरणार्थियों की याद दिलाते हैं। इस गलती को कैसे सुधारोगे? पहले ये बताओ। मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, ये देश का भाग्य ही है, लेकिन नोटबंदी और लॉकडाउन में जिन्होंने नाहक अपने प्राण गंवाए, उन्हें किस अमृत से जीवित करोगे?